लखीमपुर-खीरी: 22.27 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजॉल की गोली, एक फरवरी को चलेगा अभियान
लखीमपुर-खीरी, अमृत विचार। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस यानी नेशनल डीवार्मिंग डे (एनडीडी) का आयोजन एक फरवरी को किया जाएगा। इस दिन एक से 19 वर्ष तक के बच्चों व किशोर-किशोरियों के पेट से कीड़े (कृमि) निकालने के लिए एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाई जाएगी। इस दिन दवा खाने से छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाने के लिए पांच फरवरी को मॉपअप राउंड चलाया जाएगा।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) की नोडल अधिकारी डॉ अमित सिंह ने बताया कि हर वर्ष दो बार अभियान चलाकर पेट के कीड़े निकालने की दवा खिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत जिले के 2,663 सरकारी, 1,939 निजी विद्यालयों के अलावा 3,565 आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल किया गया है। इस अभियान के तहत 22,27,885 बच्चों को एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाने का लक्ष्य है।
उन्होंने यह भी बताया कि एक से दो वर्ष तक के बच्चों को 200 मिलीग्राम यानि आधी गोली व दो से 19 वर्ष तक के बच्चों व किशोरों को 400 मिलीग्राम यानि पूरी गोली खिलाई जानी है। छोटे बच्चों को गोली पीसकर दी जानी है, जबकि बड़े बच्चों को इसे चबाकर खाना है।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक सचिन गुप्ता ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत एक से पांच वर्ष तक के बच्चों, छह से 19 वर्ष तक के स्कूल न जाने वाले बच्चों और घुमंतु व ईंट-भट्ठों आदि जगहों पर काम करने वाले श्रमिकों के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से एल्बेंडाजॉल की गोली खिलाई जाएगी।
इसके अलावा छह से 19 वर्ष तक के स्कूल जाने वाले बच्चों को शिक्षक-शिक्षिकाओं के माध्यम से पेट के कीड़े निकालने वाली दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में बाल विकास परियोजना अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी सहित स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, किशोर स्वास्थ्य काउंसलर, बीसीपीएम को जिला स्तरीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
क्यों जरूरी है दवा खिलाना
सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि पेट में कीड़े होने से बच्चों और किशोर-किशोरियों में खून की कमी, कुपोषण, भूख न लगना, कमजोरी, स्वास्थ्य खराब होना और समुचित मानसिक विकास का न होना जैसी समस्याएं हो जाती हैं। इन्हीं समस्याओं से बचाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जाता है।
उन्होंने बताया कि बच्चे अक्सर जमीन में गिरी चीज उठाकर खा लेते हैं। कई बार वह नंगे पैर ही संक्रमित स्थानों पर चले जाते हैं, जिससे उनके पेट में कीड़े (कृमि) विकसित हो जाते हैं। इससे बच्चा शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने लगता है। एल्बेंडाजॉल खा लेने से यह कीड़े पेट से बाहर निकल जाते हैं, जिससे शरीर में आयरन की शोषक क्षमता बढ़ जाती है। इससे शरीर में एनीमिया अर्थात खून की कमी दूर होती है।
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