सहायक शिक्षक भर्ती के आवेदन पत्र में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती के आवेदन में त्रुटिपूर्ण एवं भ्रामक जानकारियां देने के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि भविष्य में परिषदीय स्कूलों में सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में "परिणाम की स्थिति" का एक अतिरिक्त कॉलम भी आवेदन पत्र में शामिल किया जाए, जिससे उन उम्मीदवारों को भी आवेदन करने का अवसर मिले, जिनके परिणाम प्रतीक्षित हैं या जिनके कुछ ही दिनों में घोषित होने की संभावना है।

उक्त आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने अजय कुमार व अन्य की याचिका पर विभागीय आदेशों को रद्द करते हुए पारित किया है। इसके साथ ही याचियों को 3 सप्ताह के अंदर सेवाओं में शामिल करने का भी निर्देश दिया है। मामले के अनुसार दिसंबर 2014 में परिषदीय स्कूलों में 15000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया था। याचियों ने अपने ऑनलाइन फॉर्म गलत ढंग से भरे और जमा किये, जिसमें उन्होंने परिणाम घोषित हुए बिना बीटीसी पाठ्यक्रम में प्राप्त अपने अंकों का उल्लेख किया।

हालांकि याची फार्म जमा करने के कुछ दिनों के भीतर बीटीसी में उत्तीर्ण हो गए और बाद में संशोधन के लिए विंडो खुलने पर अपने आवेदन पत्र में सुधार कर दिया। कोर्ट के समक्ष प्रश्नगत मामला यह है कि पंजीकरण की तिथि पर गलत बयानी और योग्य न होने के कारण याचियों की नियुक्तियों को शून्य घोषित किया जाए या नहीं।

मामले की विशिष्ट परिस्थितियों पर विचार करते हुए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि याचियों ने पंजीकरण के चरण में अपने फार्म में गलत जानकारी दी। यह सत्य है कि उनका कार्य शुरू से ही प्रमाणित नहीं था, इस दृष्टि से वे सेवा में बने रहने के हकदार नहीं है, लेकिन विभिन्न चरणों में इस कोर्ट के हस्तक्षेप के कारण सरकार ने कई परिपत्र जारी किए और फॉर्म जमा करने की तिथि बढ़ा दी, साथ ही बाद में बीटीसी पाठ्यक्रम उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थियों को भी आवेदन करने का मौका दिया गया।

इस प्रकार फार्म जमा करने की विस्तारित तिथि से पहले ही याचीगण योग्य हो चुके थे। अतः न्याय के हित में सहानुभूतिपूर्ण और उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए याचियों की सेवा समाप्ति के आदेशों को रद्द किया जाता है। मामले से संबंधित सभी याचिकाओं को निस्तारित करते हुए कोर्ट ने कहा कि कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर आक्षेपित आदेशों की अवधि तक याचियों को वेतन का हकदार नहीं माना जाएगा, लेकिन उनकी सेवाओं को काल्पनिक आधार पर निरंतरता में माना जाएगा।

यह भी पढ़ें : लखनऊ : नवजात बच्चे को अस्पताल में छोड़ भाग रही थी मां, डॉक्टर और पुलिस ने मिलकर समझाया

संबंधित समाचार