संतकबीरनगर: विवाद में बीच बचाव करने गए युवक की पीट-पीटकर हत्या, परिजनों में कोहराम
धनघटा थानाक्षेत्र के ग्राम सोनडीहा की घटना, मोबाइल चोरी के आरोप प्रत्यारोप में हो रही थी मार-पीट
धनघटा/संतकबीरनगर। धनघटा थानाक्षेत्र के ग्राम सोनडिहा में मंगलवार को मोबाइल चोरी के विवाद में बचाव करने गए चालीस वर्षीय युवक को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए के लिए भेज दिया है। घटना से स्वजनों में शोक की लहर दौड़ गयी है।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सोनडिहा निवासी राधिका पत्नी जगन्नाथ की मोबाइल 15 दिनों पूर्व गायब हो गयी थी। मंगलवार की सुबह राधिका पत्नी जगन्नाथ ने गांव निवासी दीनानाथ की बेटी रंजन व राम हजूर की बेटी राधिका पर मोबाइल चोरी करने का आरोप लगाते हुए गाली गुप्ता देने लगी। इस बीच मौके पर दोनों पक्षों में कहा सुनी के बाद मारपीट की नौबत आ गयी।
विवाद शांत कराने के लिए दीनानाथ मौके पर गए। लेकिन दूसरे पक्ष के घनश्याम, बिपिन आदि मिलकर दीनानाथ को मारपीट कर एक नांद पर उठाकर फेंक दिया। दीनानाथ के सिर में गम्भीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गयी। इस बीच मोबाइल चोरी का आरोप लगाने वाले लोगों ने दीनानाथ के चार छोटे छोटे बच्चों को भी दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया। जिससे सूरज, चंदा, रंजन और संजन भी घायल हो गए। दीनानाथ के मौत की खबर सुनकर विपक्षी भाग खड़े हुए।
घटना स्थल पर तनाव की स्थित पैदा हो गयी। दीनानाथ के परिजनों में चीख पुकार मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक दीनानाथ की पत्नी राधिका अपने चार घायल बच्चों सूरज, चंद्रा, रंजन, संजन के साथ धनघटा थाने पहुंची और मामले की तहरीर सौंप दिया। प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि शव को पीएम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिली है, मुकदमा कायम कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी का प्रयास किया जाएगा।
सुहाग उजड़ गया, अब कैसे होगी बच्चों की परवरिश-राधिका
मोबाइल चोरी के मामले में हुई दीनानाथ की निर्मम हत्या के बाद पत्नी राधिका की बुरी दशा है। अपने चार घायल बच्चों के साथ धनघटा थाने पहुंची राधिका ने बताया कि आरोपी पक्ष उसके सगे पट्टीदार हैं। मामूली बात और झूठे आरोप लगाकर सगे पट्टीदारों ने ही उसका सुहाग उजाड़ दिया। अब बेसहारा बच्चों की परवरिश आखिर कौन करेगा।
उसने बताया कि उसके पति तो विवाद शांत कराने गए थे। लेकिन विपक्षियों ने उन्हें ही मौत के घाट उतार दिया। अब उसकी पहाड़ सी जिंदगी कैसे कटेगी और बच्चों का सहारा कौन बनेगा! उसका करुंण क्रंदन सुन मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो जा रही थीं। उसे सांत्वना देने के लिए लोगों को शब्द नहीं मिल रहे थे।
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