प्रयागराज: सरकार की स्मार्ट पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना हुई फ्लाप!, करोड़ों की साइकिलें खा रहीं जंग, नहीं हो रही देखभाल
मिथलेश त्रिपाठी, प्रयागराज। सरकार की स्मार्ट पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना को प्रयागराज में दो अक्टूबर 2021 में सुभाष चौराहे से शुरू किया गया था। इस योजना के शुरु होने पर कुल 75 स्टेशन बनाने की स्वीकृति स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को दी गई थी, हालांकि सरकार की यह योजना प्रयागराज में बेपटरी हो चुकी है। बता दें कि नगर निगम प्रशासन की लापरवाही के चलते करोड़ों की साइकिल कबाड़ की हालत में जंग खा रही हैं। अब इन साइकिलों को कोई पूछने वाला नहीं है।
स्टेशनों के साथ वर्क शाप में हजारों की संख्या में पड़ी साइकिलें कबाड़ हो चुकी है। डॉकिंग स्टेशनों की बात करें तो अब वहा पर साइकिले भी मौजूद नहीं है। बुधवार को अमृत विचार की खास पड़ताल में पाया गया कि कुछ स्टेशनों पर साइकिल है नहीं और जो हैं भी वो टूटी पड़ी हैं। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह योजना अब पटरी से उतर चुकी है।

मालूम हो कि शहर को प्रदूषण से मुक्त करने और लोगों को स्वस्थ बनाये रखने के लिए सरकार की शुरू हुई स्मार्ट योजना पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। इस योजना के तहत 30 स्टेशन शुरु किये गये थे। 45 स्टेशनों के लिए भूमि भी चिह्नित की गई। इसमे 400 से अधिक साइकिलें कंपनी चार्टर्ड बाई प्राइवेट लिमिटेड ने शुरु किया था।
इसमें कुल 75 स्टेशनों पर 750 साइकिलें रखी गयी थीं। योजना के तहत शुरु किये गये डाकिंग स्टेशनों की हालत खस्ता हाल है। बुधवार को अमृत विचार की पड़ताल में पब्लिक बाईक शेयरिंग की हकीकत सामने आई।
डाकिंग स्टेशनों पर नहीं मिला कोई आपरेटर
सरकार द्वारा शुरु की गयी पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना को नगर निगम ने पटरी से उतार दिया है। शहर के मुख्य चौराहों पर बनाये गये स्टेशनों से साइकिलें गायब हो चुकी है। बची कुची साइकिलें टूटी हालत में पड़ी है।
किसी भी स्टेशन पर कोई ऑपरेटर की मौजूदगी नहीं देखी गयी। चंद्रशेखर आजाद पार्क पर एक साइकिल मिली।
डॉ. लोहिया मार्ग चौराहे पर बने स्टेशन पर तो 18 में से सिर्फ सात साइकिलें मिली। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के पास बने स्टेशन में साइकिलें गायब रही। वहां भी कोई आपरेटर नहीं मिला।

वर्कशाप में कबाड़ पड़ी हैं साइकिलें
स्मार्ट योजना में बनाये गये बाईक शेयरिंग योजना के वर्क शाप की हालत देखने पर यह लगा कि सरकार द्वारा खर्च किये गये इस योजना में करोड़ो रुपये पानी की तरह बहा दिया गया। लेकिन योजना पूरी तरह से फ्लॉप हो चुकी है। जीएचएस और पत्थर गिरजाघर के पास बने वर्क शाप में हजारों की संख्या मर साईकिले कबाड़ हालत में जंग खाती दिखी।
उनकी देखरेख करने वाला भी कोई नहीं मिला। एक वही के कर्मचारी ने टेंडर कम्पनी के मालिक सचिन मिश्रा के बारे में बताया की वह कभी कभी यहां आते है। वार्कशाप में खुले आसमान के नीचे पड़ी बाइक शेयरिंग के नए और खराब पार्टस बर्बाद हो रहे है।
कबाड़ गोदाम की तरह बनाया गया है दफ्तर
बाइक शेयरिंग योजना का आफिस पत्थर गिरजाघर के पास खाली पड़ी सरकारी जमीन पर बनाया गया है। जो कि टिन शेड में कबाड़ गोदाम की तरह बना है। इस वर्क शाप में सैकड़ों साइकिलें टूटी पड़ी हैं। वर्क शाप के एक कर्मचारी ने बताया कि साइकिलों की मरम्मत कराई जाएगी।

गुजरात की चार्टेड कंपनी को पांच साल का मिला था मौका
स्मार्ट सिटी प्राइवेट लिमिटेड ने गुजरात की चार्टर्ड बाई प्राइवेट लिमिटेड से पांच वर्ष के लिए इस शहर में बाइक शेयरिंग के लिखापढ़ी की है।चार्टर्ड बाई खुद अपनी साइकिल बनाती है और बाजारों में शेयर करती है। कंपनी की एक साइकिल पर 30-35 हजार रुपये की लागत आती है। इस योजना को जीपीएस सिस्टम से चलाया जा रहा है। जिसमें गायब होने वाली साइकिलों को ट्रैक कर पता लगाया जा सकता है कि साइकिलें कहा है।
पर्यावरण को स्वस्थ और लोगों को सेहतमंद बनाये रखने के लिए योजना शुरु की गयी थी। जागरूकता न होने के कारण अब इन साइकिलों का उपयोग नहीं हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए लोगों को जागरूक किया जाएगा। जिससे यह योजना सफल हो सके और यह साइकिलें फिर से सड़क पर दौड़ सकें।
गणेश केसरवानी, महापौर प्रयागराज

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