पीलीभीत: मेडिकल कॉलेज के लिए एलओपी की चुनौती, डॉक्टरों की कमी आ सकती है आड़े

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पीलीभीत, अमृत विचार: तराई की तलहटी में बसे पीलीभीत में बन रहे मेडिकल कॉलेज में एनएमसी टीम से प्रथम एलओपी लेना किसी चुनौती से कम नहीं लग रहा। संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के स्वीकृत 58 पदों में से आधे खाली हैं। 

सबसे अधिक परेशानी यह है कि कई विषयों में एक भी प्रोफेसर नहीं हैं। जबकि कॉलेज में इस माह ही एनएमसी का निरीक्षण संभावित है। इसके बाद भी तैयारियां अधूरी पड़ी है। क्योंकि एनएमसी टीम गाइड लाइन के तहत ही कॉलेज को मान्यता दी जाती है। मगर कॉलेज अभी भी प्रवक्ताओं की कमी और संस्थानों से जूझ रहा है।

जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2020 में मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गई थी। खाग गांव में एकेडमिक भवन, लैब, प्रशासनिक भवन, प्रोफेसर, कर्मचारी आवास का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। अब सिर्फ फिनिशिंग का काम बाकी है। वहीं, जिला अस्पताल परिसर में बन रहे 200 बेड अस्पताल भवन और स्टाफ के हॉस्टल भी बन रहा है।  

कॉलेज में सत्र 2024-25 से एमबीबीएस पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संकाय सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग में मान्यता के लिए अनुमति मांगी है। जिसको लेकर 15 फरवरी तक एनएमसी की टीम दौरा प्रस्तावित है। हालांकि टीम कब आएगी कहां से आएंगी। इसको लेकर कुछ भी अफसर को कुछ नहीं मालूम हैं। 

मगर एनएमसी टीम की रिपोर्ट मान्यता की अनुमति लेना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्रोफेसर के कुल 58 पद सृजित किए गए हैं। जिनमें सिर्फ 16 पदों पर ही भर्ती हो सकी है।  जबकि 42 पद अभी भी खाली चल रहे हैं। इनमें आठ प्रोफेसर के सापेक्ष तीन, असिस्टेंट प्रोफेसर में 25 के सापेक्ष आठ और  एसोसिएट प्रोफेसर में 20 पदों के सापेक्ष पांच ही कार्यरत हैं। 

इसके अलावा मानक के अनुरुप  जूनियर रेंजीडेट कुल 14 और सीनियर रेजीडेंट 16 डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है, जो मानक के अनुरुप नहीं है। जबकि एनएमसी टीम शासन के तय मानक के अनुरुप ही एमबीबीएस की मान्यता देती है। हालांकि नवागत प्रिसिंपल डॉ. संगीता अनेजा ने ज्वाइन करने के बाद से ही मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए रुपरेखा तय करना शुरू कर दिया है। 

महिला अस्पताल को एमसीएच विंग में शिफ्ट कराया जा चुका है। इमरजेंसी को पुराने महिला अस्पताल में शिफ्ट करने की तैयारी है। आलम यह है कि पैथोलॉजी में प्रोफेसर नहीं मिला है। जिस वजह से एसोसिट प्रोफेसर डॉ. विभुति गोयल को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह गायनी में भी अभी तक कोई प्रोफेसर नहीं मिला है। 

जिस वजह से यहां भी एसोसिट प्रोफेसर डॉ. रुपल खरे को नई जिम्मेदारी दी है। सर्जरी, आर्थोपैडिक समेत अन्य विभागों में भी प्रोफेसर नहीं मिले हैं। जो निरीक्षण के दौरान समस्या बन सकते हैं। हालांकि  मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि टीम को तैयारियां पूरी मिलेगी। जिसको लेकर दिन रात काम किया जा रहा है।    

200 बेड का अस्पताल, हॉस्टल भी अधूरा
 स्वाशासी महाविद्यालय के भीतर 200 बेड का नया अस्पताल बनाया जा रहा है। जहां ओपीडी समेत अन्य सुविधाओं को संचालन किया जाएगा।  लेकिन अभी तक अस्पताल में सिर्फ 70 फीसदी कार्य ही पूरा हो सका है। कार्यदायी संस्था मई तक कार्य पूरा करने की बात कह रही है।

ऐसे में अस्पताल में ही अलग-अलग विभागों को विभाजित किया जा रहा है। ताकि एनएमसी कराई जा सके। इसके अलावा यहां आने वाले पैरामेडिकल स्टाफ के लिए बनाए जा रहे हॉस्टल भी हैंडओवर नहीं हो सका है। जिस समस्या बन सकता है। क्योंकि यहां आने वाला स्टाफ अधिकतर बाहर से होगा। जिससे रहने के लिए ठिकाना देना पड़ेगा।

ब्लड कंपोनेट यूनिट भी नहीं हुई शुरु
मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक से संबद्ध करते हुए ब्लड कंपोनेट सेपरेशन यूनिट बनाने का निर्णय लिया गया था। जिसके निर्माण के लिए 17.61 लाख का बजट भी आवंटित कर दिया गया। मगर साल 2023 पूरा होने के बाद भी ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन  यूनिट शुरू नहीं हो सकी है।

अफसरों की मानें तो भवन निर्माण पूरा हो चुका है,मशीनें भी आ गई है, लेकिन लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है। अब एनएमसी से पहले उसे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्लड बैंक और कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को जोड़ने के निर्देश  दिए हैं। हालांकि अभी तक पूरा नहीं हो सका है।

फर्नीचर और उपकरणों की खरीद भी अधर में
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद वहां पढ़ाई के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए क्लास में बैठने के लिए फर्नीचर और संसाधन खरीदने के लिए शासन ने 16 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। क्योंकि बिना तैयारियों के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की मान्यता नहीं मिल सकेगी।

कयास लगाए जा रहे हैं कि टीम निरीक्षण करने के लिए आ सकती है। इसलिए तैयारियों को तेजी दी गई है। फर्नीचर खरीदने के लिए सूची बनाई जा रही है। तैयार हो रहे 200 बेड के अस्पताल को लेकर भी संसाधन खरीद  जा रहे हैं। ताकि सुविधाएं मुहैया हो सके। लेकिन अभी तक  फर्नीचर और उपकरणों की खरीद अधर में लटकी हुई है।

मेडिकल कॉलेज में एनएमसी टीम के दौरे को लेकर तैयारियां चल रही है। स्टाफ में अभी थोड़ी कमी है। वर्तमान में 20 चिकित्सकों ने कार्यभार ग्रहण किया है। बकाया का रिजल्ट आना शेष है। जल्द सभी व्यवस्थाएं पूरी हो जाएंगी--- डा.संजीव सक्सेना, नोडल अधिकारी मेडिकल कॉलेज।

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