लखनऊ: यूपी में वाहनों की बिक्री भर रही है 'फर्राटा', बीते एक साल में सड़कों पर आ गए साढे़ चार करोड़ नए वाहन!
वाहनों की तेज बिक्री से सड़कों पर थम जाएगी गाड़ियों की रफ्तार, मार्ग हैं सीमित तो वाहन खरीदकर चलाएंगे कहां?
नीरज मिश्र, लखनऊ। वाहनों की रफ्तार ही नहीं उनकी 'बिक्री' भी फर्राटा भर रही है। हाल यह है कि सूबे में बीते एक साल में साढे़ चार करोड़ नए वाहन सड़क पर आए हैं। वाहनों की खरीद फरोख्त की यही गति रही तो आने वाले वर्षों में वाहन सड़क पर दौड़ेंगे नहीं रेंगेंगे। स्पीड वाहन के स्पीडोमीटर में ही दिखेगी। वाहन खरीद लिया तो सीमित सड़कें होने पर उन्हें दौड़ा नहीं पाएंगे।
हर मार्ग पर जाम से पहले ही जनता त्राहिमाम कर रही है ऐसे में वाहनों की तेज बिक्री सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार को थाम देगी। जरा सोचिए! जब मौजूदा वक्त में ही सड़क पर चलना दूभर है तो करीब एक दशक बाद नगर-नगर जाम का क्या नजारा होगा?
एक साल में 4,46,75,902 नए वाहन आ गए सड़कों पर
मार्च 2023 में करीब 4,24,10,340 वाहन प्रदेश की सड़कों पर आए। तीन माह बाद यानी 30 जून 2023 में ट्रांसपोर्ट और नॉन ट्रांसपोर्ट गाड़ियों की संख्या बढ़कर कुल 4,32,97,677 हो गई। मात्र तीन माह में ही 8,87,337 नए वाहन प्रदेश के मार्गों पर आ गए। बीते इसी वर्ष छह माह बाद सड़कों पर आए नए वाहनों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ और गाड़ियों की संख्या बढ़कर 4,46,75,902 पहुंच गई। यानी मात्र एक साल के भीतर (2023 दिसंबर तक) 22,65,562 नए वाहन आ गए।
गाड़ियों की बढ़ती संख्या की बिक्री का कुछ ये क्रम रहा
वर्ष 2023 - वाहनों की संख्या
31 मार्च - 4,24,10,340
30 जून - 4,32,97,677
31 दिसंबर - 4,46,75,902
खूब बिके दोपहिया वाहन, साढे़ तीन करोड़ से अधिक गाड़ियां बिकीं
कमर्शियल और नॉनकमर्शियल की कौन कहे सालभर में दो पहिया वाहनों की बिक्री ने तो चौंकाकर रख दिया। दिसंबर 2023 तक 3,57,33,715 दोपहिया गाड़ियां बिकीं।
यह सही है गाड़ियों की बिक्री तेज हुई है। पहले का दौर नहीं रहा। बैंकों से आसान किस्तों पर गाड़ियां मिल रही हैं। यही वजह है कि वाहनों की बिक्री में तेज इजाफा देखने को मिल रहा है। आने वाले वर्षों में लोग रफ्तार वाली गाड़ियां ले तो लेंगे लेकिन सड़कों पर लगे जाम में इन्हें चलाना मुश्किल हो जाएगा। बेहतर होगा कि लोग सार्वजनिक गाड़ियां नगर बस, मेट्रो, ऑटो रिक्शा, टैक्सी, ओला-उबर और ई-वाहनों के जरिए शहर की सड़कों पर सफर करें। इससे प्रदूषण पर भी नियंत्रण होगा और लोग आरामदेय सफर का लाभ ले सकेंगे।
पुष्पसेन सत्यार्थी, अपर परिवहन आयुक्त सड़क सुरक्षा
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