Hardoi Dog attack : घर के बाहर खेल रहे बच्चे पर कुत्ते ने किया हमला, डॉक्टर ने लखनऊ किया रेफर
हरदोई, अमृत विचार। गांव में घूम रहे एक पागल कुत्ते ने घर के बाहर खेल रहे एक तीन वर्षीय बच्चे के ऊपर हमला करते हुए उसे बुरी तरह से चबा कर ज़ख्मी कर दिया। बच्चे के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुन कर तमाम लोग दौड़ पड़े। जिन्होंने बड़ी मुश्किल से उस पागल कुत्ते को वहां से लाठी-डंडो से खदेड़ा। ज़ख्मी हुए बच्चे को मेडिकल कालेज लाया गया, जहां के डाक्टरों ने उसे लखनऊ के लिए रिफर कर दिया।
बताया गया है कि शुक्रवार की शाम को बेहटा गोकुल थाने के तौकलपुर निवासी अवधेश का तीन वर्षीय पुत्र विकास अपने घर के बाहर खेल रहा था,उसी बीच वहां पहुंचे एक पागल कुत्ते ने उसके ऊपर हमला बोल दिया और उसके चेहरे के एक हिस्से को अपने मुंह में रख कर चबा गया। विकास के चीखने-चिल्लाने की आवाज़ सुन कर न सिर्फ उसके घर वाले बल्कि आस-पड़ोस के तमाम लोग दौड़ पड़े, जिन्होंने उस पागल कुत्ते को लाठी-डंडो से खदेड़ कर गांव से बाहर भगाया। कुत्ते के इस हमलें से गांव के लोगों की दहशत का यह आलम है कि वे अपने-अपने बच्चों को घर से बाहर भेजना तो दूर उन्हे झांकने तक नहीं दे रहें हैं। इधर ज़ख्मी विकास को इलाज के लिए मेडिकल कालेज लाया गया। जहां डाक्टरों ने उसकी हालत को देखते हुए लखनऊ के लिए रिफर कर दिया है।
31 दिनों में 1374 हुए ज़ख्मी!
पिछले महीने जनवरी में आवारा कुत्तों ने सैकड़ों लोगों पर हमला किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ जनवरी के 31 दिनों में आवारा घूमने वाले कुत्ते 1374 लोगों को हमला कर ज़ख्मी कर चुके हैं। लेकिन अगर गैर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो तकरीबन दो से सवा हज़ार लोग आवारा कुत्तों का शिकार हुए हैं। जैसा कि कुछ लोगों का कहना है कि वैसे तो सरकारी अस्पतालों में एंट्री रैबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं, लेकिन उसे लगवाने के लिए न सिर्फ घंटों लाइन लगानी पड़ती है बल्कि वहां बेफालतू की झिक-झिक भी करनी पड़ती है। लोग इससे दूर रहने के लिए निजी हास्पिटल में पहुंचते हैं।
बंदरों के हमले भी बढ़े
शायद ही कोई ऐसा ठिकाना बचा हो जहां बंदरों का आतंक न हो। बीते जनवरी महीने में 855 लोग बंदरों के हमले का शिकार हुए। 855 का आंकड़ा मेडिकल कालेज का है, जहां उन लोगों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाया गया। इतने लोगों को इंजेक्शन लगा और कुछ की तो मौत भी हो चुकी है।लेकिन अगर गैर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो एक महीने में ही तकरीबन डेढ़ हज़ार लोग बंदरों के हमले में ज़ख्मी हुए।
