Kanpur: सीएसए के विशेषज्ञों ने आलू की नई प्रजातियों पर दिया जोर; बोले- बेहतर फसल के लिए हरी खाद जरूरी...
सीएसए के विशेषज्ञों ने आलू की नई प्रजातियां उगाने पर जोर दिया।
आलू की बेहतर पैदावार के लिए हरी खाद का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। इससे आलू की अधिक पैदावार होने की असीम संभावना है। क्षमता से कम पैदावार होने का बड़ा कारण तकनीक का कम प्रयोग किया जाना है।
कानपुर, अमृत विचार। आलू की बेहतर पैदावार के लिए हरी खाद का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। इससे आलू की अधिक पैदावार होने की असीम संभावना है। क्षमता से कम पैदावार होने का बड़ा किसानों की ओर से तकनीक का कम प्रयोग किया जाना है। इसके अलावा किसानों को अधिक पैदावार के लिए नवीन प्रजातियों की बुआई करने की तरफ भी रुझान बढ़ाना चाहिए।
यह सुझाव शनिवार को सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञों की ओर से अरशदपुर गांव में किसानों को दिए गए। आलू फसल प्रबंधन पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण साग-भाजी अनुभाग की ओर से किया गया था। प्रशिक्षण में मुख्य अतिथि के रूप में साग भाजी अनुभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. राम बटुक सिंह मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि जनपद में आलू उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। अधिकांश प्रजातियां अपनी अनुवांशिक क्षमता के अनुरूप पैदावार नहीं दे पा रही हैं। इसका मुख्य कारण किसानों की ओर से तकनीकी का उपयोग किया जाना बहुत कम है। इसलिए अधिक आलू उत्पादन के लिए नवीन प्रजातियों का प्रयोग करना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान सदस्य वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि ऐसे खेत जहां आलू की फसल की बुवाई की जाती है उसमें बुवाई से पहले हरी खाद का प्रयोग जरूर करना चाहिए। इससे उर्वरक उपयोग क्षमता बढ़ती है।
लहसुन के लिए सल्फर जरूरी
प्रशिक्षण में किसानों से मसाला वैज्ञानिक डॉ. संजीव सचान ने कहा कि लहसुन की फसल पर सल्फर के प्रयोग करना लाभदायक हो सकता है। उन्होंने भी किसानों को बेहतर मसाला फसल के उत्पादन के लिए तकनीकी का प्रयोग करने का सुझाव दिया।
कटाई के बाद मूंग की बुवाई
किसानों को एक फसल के बाद दूसरी फसल को तैयार करने का भी तरीका बताया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अरुण सिंह ने कहा कि आलू फसल की कटाई के बाद मूंग, उर्द, मक्का की बुवाई करने से बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
डॉ. अजय कुमार यादव ने कहा कि जो किसान उत्पादित आलू कंदो को बीज के रूप में रखना चाहते हैं वे भंडारण से पहले उनका बोरिक एसिड से तीन प्रतिशत घोल से अवश्य उपचारित करना चाहिए।
