काव्यपाठ में हुई स्तुति: राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए...
रामोत्सव के तहत संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित हुआ कवि सम्मेलन
देश भर से आये कवियों ने अपने पाठ से की श्रीराम की आराधना
अयोध्या। रामोत्सव के तहत आयोजित हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शृंखला में संस्कृति विभाग की ओर से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रीराम सांस्कृतिक संकुल मंच अयोध्या धाम में आयोजित इस कवि सम्मेलन में देशभर के कवियों ने अपने-अपने काव्यपाठ के माध्यम से प्रभु राम की आराधना की और पूरा माहौल भक्तिमय कर दिया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे प्रसिद्ध कवि चिराग जैन ने काव्यपाठ करते हुए सुनाया कि त्याग दी हर कामना निष्काम बनने के लिए, तीन पहरों तक तपा दिन शाम बनने के लिए। घर नगर परिवार ममता प्रेम अपनापन दुलार, राम ने खोया बहुत श्रीराम बनने के लिए। इस पर श्रोताओं ने जमकर उत्साहवर्धन किया।
वहीं हास्य कवि शंभू शिखर ने जो लोग राम जी का हैं विरोध कर रहे, बतला के खीर उनको तुम पेट्रोल पिला दो और श्री राम से बड़ा कोई भी मंत्र नहीं है... सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। निकुंज शर्मा ने अपने काव्य पाठ में हे महासागर सुनो कर जोड़ तुमसे, मैं सिया का राम रस्ता मांगता हूं... प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्रीय महामंत्री भाजपा विजय प्रताप सिंह, जिला प्रभारी मिथिलेश त्रिपाठी, आनंद सावरण,भजन गायक ओमप्रकाश, आशुतोष द्विवेदी, अभय निर्भीक, रामायण धर द्विवेदी आदि मौजूद रहे। प्रारंभिक संचालन सदक-ए-हुसैन ने किया।
इन्होंने भी किया काव्यपाठ
कार्यक्रम में डॉ. सुशांत शर्मा ने राम कितना रुचिर है चरित आपका, ज्यों गगन पर उषा की सुघर कल्पना..., राजस्थान के सुनील व्यास ने दुनिया झूम रही है पीकर राम नाम रस प्याली... कवियत्री मनीषा शुक्ला ने शायद मूरत से आ जाएं मानवता में प्राण, तुम्हारे आने से भगवान...पढ़कर सबको भावुक कर दिया।
वहीं मथुरा की पूनम वर्मा ने हमारी भावनाओं के सुखद परिणाम आए हैं कि सदियों बाद अपने राम अपने घर में आए हैं... कवयित्री सरिता शर्मा ने धर्म का अर्थ धाम से पूछो, प्रेम का अर्थ श्याम से पूछो, कितने मीठे हैं बेर शबरी के, पूछना है तो राम से पूछो...। अध्यक्षता कर रहे ओज कवि विनीत चौहान ने सुनाया कि अनिरुद्ध होना ही पड़ा दशरथी वरदान को, अवरूद्ध होना ही पड़ा फिर दोबारा राम को, वनवास न जाना पड़े इसलिए हमको लखन- सा क्रुद्ध होना ही पड़ा।
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