अमेठी: बिना परमिट, फिटनेस, 'पीयूसी' और बीमा के जिले में दौड़ रहीं सैकड़ों स्कूली वैन, बच्चों की जान की बनीं दुश्मन!

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लक्ष्मण प्रसाद वर्मा, अमेठी। जिले के स्कूलों में लगी लगभग एक सैकड़ा वैन बच्चों के लिए खतरा बनी हुई हैं। इन वाहनों के परमिट, फिटनेस, प्रदूषण और बीमा समेत मानक अधूरे हैं। परिवहन विभाग का धरपकड़ अभियान का असर भी इन स्कूली वाहनों पर नजर नहीं आ रहा है।

शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों के निजी स्कूलों में प्राइवेट वाहनों की भरमार है। कई वाहन बिना फिटनेस के फर्राटा भर रहे हैैं। इन वाहनों में बच्चे पूरी तरह से असुरक्षित हैं। सिर्फ कागजों पर एआरटीओ, पीटीओ ने ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए अभियान भी चलाया। स्कूली वाहनों को फिटनेस और मानक पूरा करने के निर्देश दिए थे। जिसका अभी तक असर नहीं दिखा है। अभिभावकों की जेब शिक्षा के नाम पर ढीली करने वाले स्कूल संचालक स्कूली वाहनों के कागजात तक नहीं सही करा पा रहे है।

Untitled-49 copy

बान्दा से टाण्डा को जाने वाले नेशनल हाइवे पर कासिमपुर के पास पूरे हकीम में निकट चंद्रा ऑटो मोबाइल स्थित एक निजी पब्लिक स्कूल में मैजिक संख्या यूपी 36 टी 3669 बच्चों को लाती ले जाती है। लेकिन इसका बीमा 8 नवंबर 2022, फिटनेस 21 नवंबर 2023, परमिट 11 नवंबर 2023 और प्रदूषण 19 नवंबर 2023 को समाप्त हो गया है।

इसी तरह इसी स्कूल में मैजिक संख्या यूपी 36 टी 1092 का फिटनेस 8 मार्च 2021, बीमा 30 जुलाई 2020 को खत्म हो चुका है। इन स्कूलों में बिना बीमा, फिटनेस व परमिट के नौनिहालों के जान के दुश्मन बन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। 95 फीसदी स्कूली वाहनों में न तो फायर किट है और न ही फर्स्ट एड बॉक्स। स्कूली मैजिक और वैन की खिड़कियों पर रॉड भी नहीं लगी है।

ये है स्कूली वैन के मानक

स्कूल वाहन के परमिट दो तरह के होते हैं। स्कूल प्रबंधन की वैन और निजी वैन का स्कूल से अनुबंध होने का अलग-अलग परमिट दिया जाता है। स्कूल प्रबंधन वाली वैन पूरी तरह से पीले रंग की होती है, जबकि अनुबंधित वैन के चारों तरफ पीली पट्टी होती है। स्कूल की वैन सात सीटर होती है। वैन की खिड़कियों के पास रॉड लगी होनी चाहिए, जिससे बच्चे बाहर मुंह न निकाल सकें। वैन में स्कूल का नाम, पता, मोबाइल नंबर लिखा होना जरूरी होता है। जिससे किसी भी तरह की जानकारी प्रबंधन को दी जा सके। बच्चों के बैग रखने के कैरियर और स्टैंड होना चाहिए।

फीस बढ़ाई, फिर भी मानक अधूरे

कोरोना काल के दौरान सामाजिक दूरी का पालन करने के निर्देश मिलते ही स्कूल वैन वालों ने एक किलोमीटर से तीन किलोमीटर की दूरी का किराया 500 रुपये से बढ़ाकर आठ सौ रुपये कर दिया था। जबकि पांच किलो मीटर से आठ किलोमीटर की दूरी का किराया आठ सौ के स्थान पर 1000 रुपये से 1200 रुपये किया गया था, लेकिन मानक आज भी पूरा नहीं कर सके।

ऐसे वाहन बच्चों को ठूंस कर ले जाते हैं। निजी वैन से बच्चों को स्कूल भेजने में खतरा रहता है, लेकिन संसाधनों का अभाव होने के कारण यह मजबूरी बन गया है। इसी का स्कूल संचालक फायदा भी उठाते है। मनमानी फीस लेने के बाद भी मानक पूरा नहीं कर रहे हैं। प्रशासन सख्ती बरते तभी कुछ हो सकता है।

किन स्कूली वैन, बस का परमिट, बीमा, फिटनेस या फिर प्रदूषण खत्म हुआ है उसकी जांच कराई जाएगी। बिना मानक पूरा किये स्कूल संचालक वैन बस का इस्तेमाल करते पाए गए तो कार्रवाई जरूर की जाएगी।

                                                                                                                 अरविंद त्रिवेदी, एआरटीओ, अमेठी

Untitled-48 copy

यह भी पढ़ें: गोंडा: घर से निकला युवक लापता, दो दिन बाद होनी है शादी, परिजनों ने थाने में दर्ज करायी गुमसुदगी की रिपोर्ट

संबंधित समाचार