हल्द्वानी: कब्जा बनाए रखने के लिए खड़ा कर दिया अवैध मदरसा 

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Edited By Amrit Vichar
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हल्द्वानी, अमृत विचार। मलिक का बगीचा में सरकारी जमीन पर बनाया गया मदरसा पूरी तरह से अवैध था। मदरसा शिक्षा विभाग में पंजीकृत ही नहीं है। साफ पता चलता है कि अब्दुल मलिक ने जमीन को अवैध तरीके से कब्जाने के लिए अवैध मदरसा बनाया था। साथ ही यहां नमाज स्थल होने का भी दावा किया जा रहा था। अब्दुल मलिक ने अवैध मदरसा और अवैध नमाज स्थल बनाकर अपनी कब्जाई हुई जमीन को धार्मिक रंग दे दिया।

धार्मिक इमारतें खड़ी कर भू-माफिया सरकारी जमीन कब्जाने का तरीका अपनाते हैं। अब्दुल मलिक के कब्जे में दशकों से मलिक का बगीचा था। इस बगीचे पर उनका कब्जा बना रहे, इसलिए अब्दुल मलिक और उसके परिवार के लोगों ने जमीन के एक हिस्से पर अवैध मदरसा बना दिया।

शिक्षा विभाग में मदरसे का पंजीकरण नहीं कराया गया था। मदरसे के साथ ही भूमिगत नमाज स्थल भी बना दिया गया। इन तरीकों से उसने आसपास के लोगों की धार्मिक भावनाओं को इससे जोड़ दिया। इसका फायदा वह लगातार उठा रहा था। इसकी ही आड़ में उसने एक बार फिर से जमीन को खुर्द-बुर्द करके बेचना शुरू कर दिया। 

अब्दुल मलिक और उसके भाई के बीच में साल 2007 में संपत्ति को लेकर विवाद हुआ। इसकी जांच करने के लिए नगर निगम और प्रशासन की टीम जब इस जगह पर पहुंची  गई। इसके बाद मामले का खुलासा होने लगा। तब पता चला कि बहुत पहले से ही यहां मदरसा बनाया जा चुका है। उसके बाद अब्दुल मलिक भी लगातार स्थानीय लोगों की भावनाओं का इस्तेमाल करता रहा। इसकी परिणति में आठ फरवरी को प्रशासन की कार्रवाई के दौरान हिंसा और आगजनी हो गई।

सरकारी जमीन बेचने की होने वाली थी जांच
हल्द्वानी। नगर निगम और प्रशासन ने जब मलिक का बगीचा में जमीनों की वैधता की जांच की तो पता चला कि लोगों को 50 रुपये के 50 स्टांप पर जमीन बेची गई है। इसके एवज में लाखों रुपये वसूले गए। जमीन का कब्जेदार अब्दुल मलिक और उसके परिवार के लोग सरकारी जमीन को अवैध तरीके से बेचते रहे और करोड़ों के वारे-न्यारे करते रहे। 

नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय और सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह को जब जमीन बेचने से जुड़े 50 रुपये के स्टांप मिले तो उन्होंने जमीन खरीदने वालों से कहा कि वह उस व्यक्ति का नाम बताएं, जिन्होंने सरकारी जमीन बेची है। हालांकि उस दौरान तो किसी ने भू-माफिया अब्दुल मलिक के भय के चलते नाम नहीं खोला लेकिन अब्दुल मलिक समझ गया कि प्रशासन अब घर-घर जाकर जमीनों की वैधता की जांच करेगा और हर जगह 50 रुपये के स्टांप वाली कहानी सामने आएगी।

उस समय इस बात तैयारी हो गई थी कि इस मामले की जांच की जाए। इससे अब्दुल मलिक फंस रहा था क्योंकि प्रशासन ने कहा था कि जिस व्यक्ति ने आम लोगों को सरकारी जमीन बेचकर रुपये कमाए हैं, लोगों के रुपये की वसूली भी उससे ही की जाएगी। मलिक का बगीचा में रहने वाले लोगों का गुस्सा अब्दुल मलिक पर भड़के, इससे पहले ही उसने लोगों के अंदर मदरसा और नमाजस्थल के नाम पर धार्मिक जहर भर दिया, जिससे वह बच जाए। हालांकि ऐसा हो नहीं पाया।

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