Kanpur: गांवों में ई-रिक्शा से कूड़ा उठान इन्सिनरेटर से कर रहे निपटान... ग्राम पंचायतों में बन रहे एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र

Amrit Vichar Network
Published By Nitesh Mishra
On

कानपुर के 305 ग्राम पंचायतों में बन रहे एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र

कानपुर, अमृत विचार। ग्रामीण क्षेत्रों में कचरे के निपटान के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) या एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आईएसडब्ल्यूएमसी) का निर्माण कराने की योजना पंचायतीराज विभाग से संचालित है। इसी के तहत जिले में 305 ग्राम पंचायतों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) के त्रिआयामी मॉडल का निर्माण हो रहा है। जिसके माध्यम से घर-दुकान, बाजार से कचरा उठान और संग्रहण किया जाएगा। 
 
ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण ग्राम पंचायतों में ठोस अपशिष्ट बढ़ रहा है और उपयोग के हिसाब से प्लास्टिक, थर्माकोल, कांच सहित अन्य अपशिष्ट काफी मात्रा में निकलते हैं। इसे देखते हुए पंचायतीराज विभाग ने ग्राम पंचायतों में आरआरसी निर्माण पर जोर दे रही है। डीपीआरओ कमल किशोर ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपशिष्ट इधर-उधर फेंके जाने के कारण काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ई-रिक्शा के माध्यम से कचरा एकत्र कराया जा रहा है।
 
बाजारों में कचरा के डिब्बे लगाए गए हैं। ये सभी प्रकार का कचरा ग्राम पंचायत स्तर पर बन रही आरआरसी ले जाया जाता है। जहां सभी प्रकार के अपशिष्ट अलग किए जाते हैं। काफी अपशिष्ट ऐसे होते हैं जिन्हें कबाड़ में दे दिया जाता है। कुछ का निपटान केंद्र पर ही हो जाता हैं, कुछ ऐसे अपशिष्ट होते हैं जो निपटान के लायक नहीं होते। इसके लिए शासन के निर्देश पर नगर निगम से अनुबंध किया जाएगा। 
 
आरआरसी का क्षेत्रफल व लागत 
 
डीपीआरओ के अनुसार एक आरआरसी निर्माण के लिए 480 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की आवश्यकता होती है। इसकी अनुमानित लागत  10 लाख या इससे ऊपर हो सकती है। इस समय 305 आरआरसी का निर्माण हो रहा है। 
 
मशीनरी से कम, मैन पावर से ज्यादा काम 
 
गांव-गांव और घर-घर ई-रिक्शा से कर्मी जाते हैं और कचरा संग्रह करते हैं। इसे आरआरसी लाकर छंटनी होती है। कुछ अपशिष्ट ऐसे होते हैं जिनका निपटान मशीन के माध्यम से होता है। जैसे मासिक धर्म अपशिष्ट, डायपर, मास्क आदि के लिए इन्सिनरेटर मशीन का प्रयोग होता है। अधिकांश काम मैन पावर से कराया जाता है। इससे रोजगार भी बढ़ेगा। 
  
कंपोस्ट खाद से होगा लाभ 
 
कचरा संग्रह में कांच, प्लास्टिक, धातु की खुरचन भी आता है। इसे खाद के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता। लिहाजा इसे रिसाइकिन के लिए कारखानों में भेज दिया जाता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश अपशिष्ट जैविक होते हैं। जिसे रिसाइकिल करके उनसे कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी। 
प्रदूषण पर अंकुश लगेगा 
 
कई प्रकार के अपशिष्ट ऐसे होते हैं, जिनका गलत प्रभाव पड़ता है। इसी का नतीजा है वायु प्रदूषण, जल और मिट्टी प्रदूषण। इसी कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी फैलती है, संक्रमण का कारण बनते हैं। आरआरसी से इस पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
 

 

संबंधित समाचार