लखीमपुर खीरीः परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के सृजित 14925 पदों के मुकाबले 6447 पद रिक्त, कई विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं

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अमित गुप्ता, लखीमपुर खीरी, अमृत विचारः बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा लंबे अरसे से बना हुआ है, लेकिन अब सृजित पदों के सापेक्ष रिक्त पदों का फासला करीब 50 फीसदी तक पहुंच गया है। कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक भी शिक्षक तैनात नहीं हैं, जिससे उन विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था एकदम चौपट है।

कई विद्यालय ऐसे भी हैं, जो शिक्षकविहीन होने के कारण शिक्षामित्र या अनुदेशक के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। मौजूदा समय में प्राथमिक विद्यालयों में करीब 4006 पद रिक्त पड़े हैं, तो वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में भी शिक्षकों के 2441 पद रिक्त हैं। सरकार जहां परिषदीय विद्यालयों में कायाकल्प कराने के साथ ही शैक्षिक गुणवत्ता का स्तर बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष निपुण असेसमेंट टेस्ट (नैट) परीक्षा का आयोजन करा रही है।

इसके साथ ही बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए विद्यालयों में लाइब्रेरी बनाने के लिए पैसा खर्च कर रही है। बच्चों के खेलने के लिए विद्यालयों को खेल सामग्री खरीदने के लिए बजट दिया जाता है। ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जा सके, लेकिन शिक्षकों के तमाम पद रिक्त होने से शैक्षिक स्तर गिरता जा रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा गरीब बच्चों को भी गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के दावों में दम नजर नहीं आ रहा है।

इससे परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत गरीब बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के 3106 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के आंकड़ों पर गौर करें तो प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 10619 पद सृजित हैं, जिसके सापेक्ष 6613 शिक्षक तैनात हैं।

जबकि शिक्षकों के 4006 पद रिक्त हैं। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालयों कुल 4306 पद शिक्षकों के स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष वर्तमान में 1865 शिक्षक ही तैनात हैं। जबकि 2441 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। इस कारण कई विद्यालय शिक्षक विहीन हो चुके हैं, जिससे कई विद्यालयों में तालाबंदी होने के हालात बने हुए हैं। 

बीएसए कार्यालय की नाक के नीचे संचालित संविलियन विद्यालय महाजनगर के हालात देखकर सहज अंदाजा लग जाता है, जहां पर 284 बच्चे पंजीकृत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए एक शिक्षिका की तैनाती है, लेकिन सोमवार को वह विद्यालय से नदारद थी। बच्चे धमा-चौकड़ी मचा रहे थे। पूछने पर बच्चों ने बताया कि मैम किसी काम से बाजार गई हैं। जानकारी की तो पता चला कि यहां पर शिक्षिका आरती चोपड़ा की तैनाती है। 

नगर क्षेत्र के 32 विद्यालयों में मात्र 14 शिक्षकों की तैनातीः  नगर क्षेत्र लखीमपुर, गोला और मोहम्मदी में कुल 32 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से छह विद्यालयों में एक भी शिक्षक व शिक्षामित्र नहीं है। इन विद्यालयों में 4010 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए पांच प्रधानाध्यापक व नौ सहायक अध्यापक कुल 14 शिक्षक तैनात हैं।

इसके अलावा 22 शिक्षामित्र भी कार्यरत हैं। शहर के प्राथमिक विद्यालय जहूरबाग में सिर्फ एक शिक्षामित्र तैनात है। प्राथमिक विद्यालय कल्लूमल में 24 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए न शिक्षक हैं न ही शिक्षामित्र तैनात है। प्राथमिक विद्यालय कमलापुर में 245 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन यहां भी बच्चों को पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक या शिक्षामित्र तैनात नहीं है। अब सवाल यह है कि बच्चों को कौन पढ़ता होगा।

इसी तरह प्राथमिक विद्यालय ईदगाह, एसपी बाजपेई, सेठ प्यारेलाल में भी न तो एक भी शिक्षक है और न ही शिक्षामित्र तैनात है। गोला नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय आदर्श में 116 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन एक भी शिक्षक या शिक्षामित्र की तैनाती नहीं है। ऐसे ही अन्य ज्यादातर विद्यालयों में शिक्षक न होने के कारण सिर्फ एकल शिक्षामित्र के सहारे विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। 

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकां की कमी है, जिससे कुछ विद्यालयों में एक भी शिक्षक न होने से वहां शिक्षामित्र के सहारे संचालन करना मजबूरी है। शिक्षकों की कमी से शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। नगर क्षेत्र के विद्यालयों में प्रशिक्षु शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं। देहात क्षेत्र के विद्यालयों में भी शिक्षकां की कमी को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षकां के रिक्त पदों को लेकर सूचना शासन को भेजी जा चुकी है।- प्रवीण कुमार तिवारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी 

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