इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया आदेश, डीआईओएस के पास भरण- पोषण के मामले में वेतन कटौती का अधिकार नहीं
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा अवैध रूप से वेतन कटौती के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज अधिनियम, 1971 की धारा 3 के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक के पास वेतन कटौती की शक्ति नहीं है, जब तक कि सक्षम न्यायालय द्वारा वेतन से किसी भी प्रकार की वसूली या कटौती का निर्देश देने वाला आदेश न दिया गया हो। उक्त आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने जितेंद्र कुमार चौधरी की याचिका को स्वीकार कर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जारी नोटिस को खारिज करते हुए पारित किया है, साथ ही विपक्षियों के लिए उचित फोरम के समक्ष आवेदन दाखिल कर उपाय करने का रास्ता खुला छोड़ा है। इसके अलावा कोर्ट ने वसूल की गई राशि को समायोजित करने का निर्देश भी दिया है।
दरअसल याची को जिला विद्यालय निरीक्षक, वाराणसी ने प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय के आदेश के अनुपालन में नोटिस जारी की थी, जिसके तहत भरण-पोषण की राशि की कटौती याची के वेतन से की जाने की बात कही गई थी। इसी आदेश के खिलाफ याची द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
याची के अधिवक्ता का तर्क था कि जिला विद्यालय निरीक्षक को अदालत के आदेश के निष्पादन अधिकारी के रूप में कार्य करने का कोई अधिकार नहीं है। एक शिक्षा प्राधिकारी होने के नाते जिला विद्यालय निरीक्षक याची को परिवार न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए आतंकित नहीं कर सकता है। इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 के प्रावधानों के अनुसार शैक्षणिक संस्थान से जुड़े किसी मुद्दे पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा मामले में कर्मचारी की सेवा या रोजगार से संबंधित कोई मामला नहीं था। अतः यहां अधिकारी की शक्ति का प्रयोग गैरकानूनी है।
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