महादेवा कॉरिडोर की जमीन के लिए चाहिए 50 करोड़ रुपए, अभी तक नहीं मिली मंजूरी
सतीश श्रीवास्तव /बाराबंकी, अमृत विचार। बहुचर्चित महादेवा कारीडोर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के तर्ज पर विकसित करने के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश शासन ने हरी झंडी दे दी है। लेकिन अभी तक आवश्यक बजट आवंटित नहीं किया गया है। कॉरिडोर की जमीन का मुआवजा देने के लिए भी जिला प्रशासन को 50 करोड रुपए की दरकार है। हालांकि अभी भी दावा यही किया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की सूचना जारी होने से पहले ही इस पर काम प्रारंभ हो जाएगा।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने महादेवा कॉरिडोर के लिए 11 एकड़ जमीन चिन्हित की है। जिसमें 167 मकान भी शामिल हैं। इसके लिए जिलाधिकारी ने शासन से 50 करोड रुपए मांगे हैं। इस रकम से भूस्वामियों को मुआवजा दिया जाएगा। प्रस्ताव को शासन की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। कैबिनेट की मोहर लगने के बाद ही वित्तीय स्वीकृति मिलने की संभावना है। वित्तीय स्वीकृत मिलने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद महादेव में जलाभिषेक के बाद यहां कॉरिडोर बनाने की इच्छा जताई थी। इसके बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने जमीन चिन्हित करने का कार्य प्रारंभ किया। भू और भवन स्वामियों से कॉरिडोर निर्माण के लिए जमीन देने के संदर्भ में सहमति पत्र लिया जा चुका है। जिसके चलते आप इसमें कोई कानूनी व्यवधान आने की संभावना नहीं है। काशी काशी विश्वनाथ मंदिर के कॉरिडोर की तर्ज पर ही इसका भी नक्शा और प्लान तैयार किया गया है। योजना को धरातल पर उतरने के लिए मुआवजे की 50 करोड़ की रकम का इंतजार जिला प्रशासन कर रहा है।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है। सबसे पहले उन लोगों को मुआवजा दिया जाना है जिनकी जमीन इस कॉरिडोर में सम्मिलित की जानी है। इसके लिए शासन से 50 करोड रुपए की मांग की गई है। यह रकम मिलने के बाद ही योजना को धरातल पर उतरा जाएगा। इस कॉरिडोर के निर्माण पर आने वाले खर्च के लिए अनुमानित इस्टीमेट तैयार कराया जा रहा है।
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