बरेली: क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी ने DSO पर लगाया आरोप, कहा- साजिश में फंसाकर कराया था मेरा निलंबन
बरेली, अमृत विचार: कोटेदारों को चार लाख रुपये का ज्यादा भुगतान करने के मामले में निलंबित किए गए मीरगंज के तत्कालीन क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने डीएसओ पर साजिश में फंसाने का आरोप लगाया है। अब आगरा में तैनात धर्मेंद्र सिंह ने डीएम को दिए 10 पेज के लिखित स्पष्टीकरण में कहा है कि उन पर लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोप निराधार थे। असल में डीएसओ ने ही उन पर दबाव डालकर फाइल पर हस्ताक्षर कराए थे। बाद में खुद ही उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिख दिया।
धर्मेंद्र इससे पहले शासन से भी डीएसओ के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं। साजिश और संदिग्ध भूमिका के आरोप लगाकर उन्होंने इस शिकायत के साथ साक्ष्य और शपथपत्र भी दिए थे। इसके बाद अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद विभाग जीपी राय ने डीएम धर्मेंद्र के शिकायत की गहन जांच कराकर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया था।
इसी प्रक्रिया में बुधवार को धर्मेंद्र बुधवार को डीएम से मिले और उन्हें स्पष्टीकरण सौंपा। उन्होंने डीएम को बताया कि कई अनुरोध पत्र के बाद भी उनका पक्ष अब तक नहीं सुना गया है। डीएसओ ने परिवहन व्यय भुगतान संबंधी मामले में उनके खिलाफ निलंबन के साथ कठोर दंडात्मक विभागीय कार्यवाही की संस्तुति शासन को भेजी थी। उसी पर उनका निलंबन हुआ।
धर्मेंद्र ने डीएम से पांच बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने बताया कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत कोटेदारों को अक्टूबर 2021 से जनवरी 2022 तक के लाभांश और परिवहन व्यय का भुगतान किया जाना था। दबाव था कि तत्काल भुगतान किया जाए। डीएसओ के 22 फरवरी 2022 को जारी पत्र में व्यय विवरण एसडीएम के हस्ताक्षर से उन्हें भिजवाने के निर्देश दिए गए थे। तहसील मीरगंज का व्यय विवरण पूर्ति निरीक्षक मो. याकूब और पूर्ति लिपिक इमरान ने अपने हस्ताक्षर से तैयार किया।
इसके बाद डीएसओ को भेजने के लिए फाइल एसडीएम की संस्तुति के लिए प्रस्तुत की गई लेकिन एसडीएम के हस्ताक्षर नहीं हो सके। उन्होंने डीएसओ को फोन पर इससे अवगत कराया लेकिन उन्होंने दबाव डालकर एसडीएम के हस्ताक्षर की जगह उन्हीं से फाइल पर हस्ताक्षर करा लिएए।
उन्होंने भुगतान की निर्धारित प्रक्रिया में एसडीएम की संस्तुति जरूरी होने का तर्क दिया लेकिन डीएसओ ने यह कहकर उनकी बात नहीं सुनी कि भुगतान उन्हें कराना है और पत्र भी उन्हीं के पास आना है न कि डीएम के पास। धर्मेंद्र सिंह की निलंबन के खिलाफ दायर की गई रिट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश जारी कर दिया था।
यह भी पढ़ें- बरेली: 8 महीने बाद भी अल्ट्रासाउंड सेंटर्स की नहीं हो सकी जांच, पंजीकृत 232 और चल रहे 500 से अधिक
