चतुष्कोणीय गठबंधन

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Edited By Amrit Vichar
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चीन का हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव न केवल भारत बल्कि अन्य देशों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में कई बार अपनी सैन्य गतिविधियों से चीन अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया जैसे देशों की भी अनदेखी करते हुए मनमानी का रवैया अपनाता रहा है। चीन के इसी प्रभाव को रोकने …

चीन का हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता प्रभाव न केवल भारत बल्कि अन्य देशों के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस क्षेत्र में कई बार अपनी सैन्य गतिविधियों से चीन अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया जैसे देशों की भी अनदेखी करते हुए मनमानी का रवैया अपनाता रहा है। चीन के इसी प्रभाव को रोकने के लिए जब वर्ष 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हिंद प्रशांत क्षेत्र के देशों भारत, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया को मिलाकर प्रशांत क्षेत्र चतुष्कोणीय गठबंधन (क्वाड) का प्रस्ताव रखा तो उसी वक्त भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया था।

अब जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक चल रही है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि इन चार देशों का यह गठबंधन चीन की आक्रामकता रोकने में कामयाब जरूर होगा। भारत के लिए यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भी हित साधने वाली बात होगी। अमेरिका के विदेश मंत्री समेत आस्ट्रेलिया, जापान के विदेश मंत्रियों का इस मुद्दे पर बात करना इस बात की तरफ ठोस संकेत है कि हिंद-प्रशांत अवधारणा को तेजी से मान्यता मिल रही है।

भौगोलिक तौर पर हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर समुद्र का जो हिस्सा बनता है उसे हिंद-प्रशांत के नाम से जाना जाता है। हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक रूप से विश्व की विभिन्न शक्तियों के मध्य कूटनीतिक एवं संघर्ष का यह नया मंच बन चुका है। वर्तमान में विश्व व्यापार की 75 प्रतिशत वस्तुओं का आयात-निर्यात इसी क्षेत्र से होता है। विश्व के जीडीपी का 60 प्रतिशत योगदान इसी क्षेत्र से होता है। इस वक्त वैश्विक सुरक्षा और नई विश्व व्यवस्था की कुंजी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हाथ में ही है। लिहाजा भारत को दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर में चीन का मुकाबला करने के एक प्रमुख सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करना जरूरी है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र के मुक्त एवं स्वतंत्र क्षेत्र बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन भारत-जापान संबंधों के महत्व को स्वीकार कर चुका है। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि राजनीति, रणनीतिक, व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की मनमानी रोकने में क्वाड देशों का संगठन कामयाब जरूर होगा। वैसे भी चीन आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, ऐसे में अमेरिका को भारत समेत अन्य देशों का सहयोग इस क्षेत्र में जरूरी है। अमेरिका का भले ही इसमें हित छिपा हो, मगर भारत के लिए यह भविष्य के लिहाज से फायदेमंद होगा, इसमें कोई दो राय नहीं है।