किसी तीसरे की गलती के कारण योग्य अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करना उचित नहीं :High Court

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टाफ नर्स के भर्ती मामले में अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी भी मेडिकल सेटअप या अस्पताल में नर्स का पद अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वह मरीज की शारीरिक जरूरत को प्रबंधित करने, दवाई देने, मेडिकल रिकॉर्ड बनाने के साथ मरीजों की पूर्ण देखभाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वास्तव में कोई भी अस्पताल पर्याप्त नर्सिंग स्टाफ के बिना सफलतापूर्वक नहीं चल सकता है। ऐसे में अगर योग्य अभ्यर्थियों की अभ्यर्थना पर विचार ना करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जाए तो निश्चित रूप से रिक्तियों को समय भीतर योग्य उम्मीदवारों द्वारा नहीं भरा जा सकता है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने लोक सेवा आयोग की विशेष अपील को खारिज करते हुए पारित किया। 

वर्तमान अपील में रिट कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र को स्वीकार करते हुए उसे नियुक्ति देने का आदेश जारी किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि किसी तीसरे पक्ष द्वारा की गई गलती के कारण योग्य अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर कर देना उचित नहीं है। मालूम हो कि स्टाफ नर्स के पदों पर चयन के बाद भी विज्ञापित पदों में से 1,729 पद नहीं भरे जा सके, क्योंकि योग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं थे‌। 

दरअसल अभ्यर्थी रेनू ने भर्ती में अपना अनुभव प्रमाण पत्र दाखिल किया, जिसमें स्टाफ नर्स की बजाय नर्स मेंटर के रूप में कार्यानुभव दर्ज था। जिसके कारण आयोग द्वारा उनके पिछले अनुभव को नहीं जोड़ा गया। जांच में गलती मिलने पर अभ्यर्थी ने जारीकर्ता प्राधिकारी सीएमओ, रामपुर के समक्ष प्रमाण पत्र में संशोधन के लिए प्रत्यावेदन दिया। इसके बाद प्राधिकारी द्वारा अभ्यर्थी का संशोधित अनुभव प्रमाण पत्र 24.8.2022 को जारी कर दिया गया और 30.8.2022 को एक अन्य प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें प्राधिकारी ने अपनी गलती स्वीकार की थी, लेकिन दोनों प्रमाण पत्रों पर आयोग ने विचार नहीं किया।

ये भी पढ़ें -सोशल मीडिया का सबसे बड़ा प्लेटफार्म facebook सभी का हुआ logout

संबंधित समाचार