बरेली: पैमाइश में सामने आया सच, किसानों की जमीन पर है इफको का कब्जा
एसडीएम के निर्देश पर जांच को पहुंची टीम ने इफको के बाहर से की जमीन की पैमाइश
बरेली/आंवला, अमृत विचार। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कई दिनों से हीलाहवाली कर रहे इफको के अफसर बुधवार को बैकफुट पर नजर आए। एसडीएम के निर्देश पर मंगलवार को नायब तहसीलदार राजकुमार सिन्हा ने टीम के साथ इफको के बाहर से किसानों की जमीन की पैमाइश की। देर शाम टीम ने किसानों की जमीन इफको फैक्ट्री की चारदीवारी के अंदर होने की पुष्टि की है।
भमोरा के गांव नौगवां अहिरान के रामरहीश, रामदास, रामनिवास, रामवीर, धर्मवीर, भंवरपाल ने बताया कि तत्कालीन तहसीलदार ने अक्टूबर 2022 में किसानों की शिकायत पर जमीन की पैमाइश कराई। जिसके आधार पर तत्कालीन एसडीएम वेदप्रकाश मिश्रा ने एडीएम प्रशासन को रिपोर्ट भी भेजी थी कि किसानों की जमीन गाटा संख्या 233 की 0.67 हेक्टेयर जमीन चारदीवारी के अंदर नहीं है, जबकि गाटा संख्या 234 की 0.089 हेक्टेयर भूमि इफको फैक्ट्री की चारदीवारी के अंदर मिली थी, लेकिन अफसरों ने नहीं सुनी।
किसान हाईकोर्ट चले गए। वहां से तहसील प्रशासन को कोर्ट ने पिछले महीने पैमाइश कर भूमि चिह्नित करने का आदेश दिया। जिसके बाद एसडीएम ने रविवार को किसानों की जमीन की पैमाइश के लिए टीम गठित कर इफको भेजी। यहां रविवार को अवकाश होने के चलते पैमाइश मंगलवार को कराने का अनुरोध किया गया। मंगलवार को टीम फिर पहुंची और इफको के बाहर से किसानों की जमीन की नापजोख की।
नौगवां अहिरान के वीर सिंह ने बताया कि टीम ने इफको के अंदर पैमाइश करने के स्थान पर उनके खेतों में ही पैमाइश की। इफको अधिकारियों ने इफको की खतौनी दिखाई थी, जिसमें गाटा संख्या 233 का कुछ भाग इफको की खतौनी में चढा है, जबकि इस गाटे का अधिग्रहण ही नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश असाधारण गजट 21 जून 1984 के गजट में इन गाटों का उल्लेख ही नहीं है, जबकि वर्तमान की इफको की खतौनी में गाटा संख्या 233 का कुछ भाग अंकित है।
ओमशंकर सक्सेना ने बताया पहले की पैमाइश की रिपोर्ट उनके पास है, यदि इनकी नापजोख की रिपोर्ट में कुछ परिवर्तन होगा तो वह फिर से सर्वे कराने की मांग करंगे। टीम में नायब तहसीलदार राजकुमार सिन्हा, कानूनगो रामस्वरूप, इंद्रेश यादव, लेखपाल धीरज शर्मा, राहुल, बाबा भीम आदि मौजूद रहे।
कुछ किसान जांच को मान रहे संदिग्ध
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) तहसील अध्यक्ष महाराज सिंह यादव ने बताया कि तहसील के अधिकारी रविवार को कई घंटे तक इफको में रुकने के बाद वापस लौटे थे और अधिकारी न होने के कारण पैमाइश न होने की बात कही थी। मंगलवार को भी तहसील अधिकारी कई घंटे इफको में रहे, जबकि पैमाइश की औपचारिकता किसानों के खेत में की। इफको का कोई अधिकारी नहीं आया। किसान नेता ने पैमाइश को लेकर संदिग्धता जताई है। नापजोख के हिसाब से होनी चाहिए।
किसानों की जमीन के नापजोख के लिए मंगलवार को टीम भेजी गई थी। पैमाइश का काम पूरा हो गया है।। इफको में जमीन है या नहीं। यह जांच रिपोर्ट आने के बाद भी पता चल सकेगा।-गोविंद मौर्य, एसडीएम आंवला
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