ईसी के इस्तीफे पर सवाल
लोकसभा चुनावों के कार्यक्रम की संभावित घोषणा से कुछ दिन पहले चुनाव आयुक्त अरुण गोयल का इस्तीफा बहुत सारे सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि उनके इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। परंतु उनका इस्तीफा अप्रत्याशित तो है ही। विपक्षी दलों ने रविवार को पूछा कि क्या उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) या केंद्र सरकार के साथ किसी मतभेद के कारण यह कदम उठाया है।
उनका कार्यकाल 5 दिसंबर, 2027 तक था और अगले साल फरवरी में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद वह मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) बन जाते। गौरतलब है कि अरुण गोयल 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने 21 नवंबर 2022 को चुनाव आयुक्त का कार्यभार संभाला था। उनकी नियुक्ति विवादों में थी क्योंकि अपनी नियुक्ति से पहले यानी 18 नवंबर 2022 को ही उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उनकी नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी लेकिन 3 अगस्त 2023 को मंजूरी दे दी गई।
गोयल पिछले पांच वर्षों में पद छोड़ने वाले दूसरे चुनाव आयुक्त हैं। अशोक लवासा ने एशियाई विकास बैंक में शामिल होने के लिए 2020 में इस्तीफा दे दिया था। फरवरी माह में अनूप पांडे की सेवानिवृत्ति और गोयल के इस्तीफे के बाद तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग समिति में अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार हैं। यानि लोकसभा चुनाव से पहले भारत का चुनाव आयोग पूरी तरह से मुख्य चुनाव आयुक्त के हाथों में आ गया है।
कहा जा रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के साथ मतभेद के कारण अरुण गोयल को इस्तीफा देना पड़ा। पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ( सीईसी) राजीव कुमार और चुनाव आयुक्त संसदीय चुनावों की तैयारियों की निगरानी के लिए कई राज्यों के दौरे पर थे। अरुण गोयल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के साथ-साथ रहे।
गोयल ने पश्चिम बंगाल में तैयारियों के बारे में मीडिया को जानकारी देने के लिए कोलकाता में प्रेस क्रांफ्रेस में भाग लेने से इनकार कर दिया था। सीईसी ने उल्लेख किया था कि गोयल स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दिल्ली लौट आए थे। अब उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
गोयल ने ऐसे समय मे इस्तीफा दिया है जब चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बांड की जानकारी आयोग की वेबसाइट पर देनी है और लोकसभा चुनाव की घोषणा अगले सप्ताह होने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। ऐसे में केवल मुख्य चुनाव आयुक्त सारी जिम्मेदारियों को अकेले कैसे निपटाएंगे क्योंकि चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति में आमतौर पर समय लगता है।
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