पीलीभीत: हादसों की रोकथाम पर हो रही बात...नियम उल्लंघन जारी, कैसे सुधरें हालात?
पीलीभीत, अमृत विचार: सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा..का मंत्र देते हुए शासन-प्रशासन हादसों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंतित है। परिवहन विभाग भी जनपद में बढ़ते हादसों के पीछे वाहनों की तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी को वजह मानकर कार्रवाई और जागरूकता के दावे भी करता है।
मगर धरातल पर तस्वीर बदतर बनी हुई है। हादसों के बाद चंद दिन चेकिंग अभियान चलाकर इक्का-दुक्का चालान कर औपचारिकता निभाई जाती है। इसके बाद सड़कों पर नियमों को धता बताकर दौड़ रहे हादसे का सबब बन रहे वाहनों पर कोई ध्यान नहीं है।
शहर, कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों में दिन में कई बार ट्रैक्टर ट्रॉली, पिकअप समेत अन्य वाहनों में बड़ी संख्या में सवारियां बैठाकर सफर करते लोग दिखाई दे जाएंगे। इसमें महिला, बुजुर्ग बच्चे यानी कई परिवार एक साथ सफर करते मिलेंगे। जोकि साफ तौर पर नियम विरुद्ध है।
मालवाहक वाहनों में सफर पर रोक लगाई हुई है। ट्रैक्टर ट्रॉली का इस्तेमाल कृषि कार्य में ही किया जा सकता है। जनपद में भी कई बार हादसे हो चुके हैँ। जहानाबाद में बीते साल घरातियों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली पलटने से वृद्धा समेत दो की मौत हो गई थी। असम हाईवे पर पिकअप सवार हरिद्वार से लौट रहे 11 लोगों की जान भी जा चुकी है। इसके अलावा कई अन्य हादसे भी हो चुके हैं।
अभी बीते माह जनपद कासगंज में तालाब में अनियंत्रित ट्रैक्टर ट्रॉली पलटी और 23 लोगों की मौत हुई तो भी शासन स्तर से सख्ती की गई। पीलीभीत में भी परिवहन विभाग के अधिकारियों ने कुछ दिन चेकिंग अभियान चलाया, लेकिन कार्रवाई 10-12 चालान तक सीमित रह गई। इसके बाद अभी भी सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर वाहन दौड़ाए जा रहे हैं।
न तो हादसों को देखते हुए लोगों को जागरूक किया जा सका है, न ही सख्त कार्रवाई हो सकी। इतना जरूर समय गुजरने के साथ ही जिम्मेदार और बेपरवाह हो गए। माधोटांडा, पूरनपुर, बीसलपुर, बरेली हाईवे, टनकपुर हाईवे, जहानाबाद मार्ग समेत अन्य ग्रामीण अंचलों में इस तरह से मालवाहक वाहनों पर लोग सफर कर रहे हैं।
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