महत्वपूर्ण कदम

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Edited By Amrit Vichar
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निष्पक्ष चुनाव कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव से पहले सोमवार को छह राज्यों के गृह सचिवों, बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश के सामान्य प्रशासनिक विभाग के सचिव को हटा दिया है।

जिन छह राज्यों के गृह सचिव हटाए हैं, उसमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। चुनाव आयोग आम तौर पर संसदीय और विधानसभा चुनावों के दौरान ऐसी कार्रवाई करता है, जब हितों के टकराव या ऐसे अधिकारियों द्वारा सभी के लिए समान अवसर को बाधित करने की संभावना का मुद्दा सामने आता है।

चुनावों से पहले, चुनाव आयोग राज्यों को चुनाव संबंधी कार्यों से जुड़े उन अधिकारियों को स्थानांतरित करने का निर्देश देता है। यदि राज्यों द्वारा ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं किया जाता है, तो चुनाव आयोग उन्हें हटाने का आदेश देता है।

जानकारों के मुताबिक पश्चिम बंगाल के डीजीपी को स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि अधिकारी को पहले भी राज्य में 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान सक्रिय चुनाव प्रबंधन-संबंधी ड्यूटी से हटा दिया गया था।

लोकतंत्र में सभी दलों के लिए समानता की मांग की जाती है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव उन अवसरों को सुनिश्चित करते हैं। दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार कई मौकों पर चुनाव के दौरान समान अवसर बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने पर जोर दे चुके हैं। 

आयोग की इस कार्रवाई को इन्हीं प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। मौजूदा चुनाव प्रणाली कई चुनौतियों का सामना कर रही है जो इसकी ‘स्वतंत्र एवं निष्पक्ष’ प्रकृति के बारे में संदेह उत्पन्न करती हैं। सोशल मीडिया पर चलने वाले राजनीतिक अभियान कभी-कभी देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक और सामाजिक तनाव पैदा कर देते हैं जो निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने के लिए वृहद प्रयास करना चाहिए कि चुनाव में सत्तारूढ़ दल को अन्य दलों की तुलना में अनुचित लाभ प्राप्त नहीं हो रहा हो। निर्वाचन आयोग को तकनीकी नवाचार, वैधानिक सुधार, जन जागरुकता और वैश्विक सहयोग को शामिल करते हुए एक रणनीति के माध्यम से चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता है। लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनावी अखंडता, समावेशिता और जवाबदेहिता को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।