लोकसभ चुनाव: कर्मचारियों ने राजनीतिक पार्टियों को भेजा पत्र, कहा- मांगों को घोषणा पत्र में करें शामिल, तभी मिलेगा मत
लखनऊ, अमृत विचार। इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने सभी राष्ट्रीय दलों के अध्यक्ष व देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। इस पत्र में कहा गया है की जो भी पार्टी कर्मचारी की मांगों को अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी देश के कर्मचारी और उनके परिवार उस पार्टी को मतदान करेंगे।
इप्सेफ की तरफ से भेजे गए पत्र में पुरानी पेंशन बहाली, 8वें वेतन आयोग का गठन, आउटसोर्सिंग-संविदा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा व न्यूनतम वेतन के लिए नई नियमावली का गठन की मांग को घोषणा पत्र में शामिल करने की बात कही गई है।इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी पी मिश्रा ने बताया कि मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री,मंत्रीगण, सांसदों को बराबर देते आ रहे हैं।
इतना ही नहीं रैली वा प्रदर्शन करके मांग करते रहे हैं कि अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही पुरानी पेंशन को बहाल कर दिया जाये। क्योंकि बुढ़ापे में दो वक्त की रोटी के लिये पेंशन मिलती रही है। बच्चे बाहर नौकरी करने चले जाते हैं। ऐसे में यदि पेंशन भी नहीं मिली तो सेवानिवृत कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री,मंत्रीगण, सांसद, विधायक कई पेंशन कैसे ले रहे हैं। कहावत है कि मलिक खुशहाल रहे और परिवार भूखा रहे यह कहा का न्याय है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कर्मचारियों को भी सचेत किया है कि वे यदि अपने मत का सोच समझ कर प्रयोग नहीं करेंगे तो भविष्य में होने उनकी एवं परिवार की दशा ख़राब होगी इस पर गौर करें।
खेद का विषय है कि कोई भी दल कर्मचारियों की पीड़ा पर ध्यान नहीं दे रहा है। वर्तमान चुनाव कर्मचारियों के भविष्य को बनाने और बिगाड़ने वाला होगा। पूंजीवादी व्यवस्था में कर्मचारी बंधुआ मजदूर होते हैं इसलिए एकजुट होकर सोच समझकर अपने मत का प्रयोग करें। महासचिव प्रेमचंद ने बताया कि विगत 6 मार्च को देश भर के कर्मचारियों ने सत्याग्रह करके पुनः प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा परंतु उनकी तरफ से कोई रुचि नहीं ली गई।
यहां तक की वार्ता करने की भी इच्छा व्यक्त नहीं की गई। सरकार कहती है कि देश विकसित बनने जा रहा है। वहीं पर आउटसोर्स कर्मचारी 6000 से 8000 रुपए में अपने परिवार का खर्च कैसे चलाएगा इस पर कभी सोचा ही नहीं लाखों युवा वर्ग बेरोजगारी का शिकार है। लगभग 30 लाख पद देश के विभिन्न राज्यों में रिक्त पड़े हैं उन पर आउटसोर्स कर्मचारी रखा गया है।
