एससी/एसटी अधिनियम और सीआरपीसी में जमानत के प्रावधान अलग :हाई कोर्ट
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी-एसटी अधिनियम के तहत होने वाली कार्यवाही पर विचार करते हुए कहा कि जिन आपराधिक मामलों में आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है, उन पर सीआरपीसी के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जा सकती है, भले ही अपराध की सुनवाई विशेष अदालतीं द्वारा की जा रही हो। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद हत्यारोपी प्रमोद द्वारा दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
आरोपी के विरुद्ध पुलिस स्टेशन राया, जिला मथुरा में मुकदमा पंजीकृत किया गया था।आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत आरोप पत्र दाखिल होने के बाद आपराधिक मामले की सुनवाई एससी/एसटी अधिनियम के तहत स्थापित विशेष अदालत द्वारा की जा रही थी, लेकिन जमानत के संबंध में एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधान के तहत विचार नहीं किया जा सकता। उक्त अधिनियम पीड़ितों की सुरक्षा और अभियुक्तों के अभियोजन के लिए कुछ विशेष प्रक्रिया निर्धारित करता है। अतः उपरोक्त अधिनियम के तहत अभियुक्तों के लिए जमानत देने के प्रावधान सीआरपीसी से अलग हैं। अंत में कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई विचार किए बिना आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।
ये भी पढ़ें -अयोध्या: ऋण खातेदार की पहचान करना शिक्षक को पड़ा महंगा, बैंक खाते के संचालन पर लगी रोक
