लखीमपुर-खीरी: बंदियों की होली इस बार रहेगी फीकी, जेल में नहीं बना हर्बल गुलाल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखीमपुर खीरी, अमृत विचार: जिला कारागार में पिछले साल बंदियों ने खुद हर्बल गुलाल तैयार किया था और खूब होली खेली थी। होली से दस दिन पहले से वाद्य यंत्रों पर फाल्गुनी गीतों का अभ्यास किया था, लेकिन इस बार बंदियों की होली काफी फीकी रहेगी। गाजर, पालक और चुकंदर उपलब्ध न होने से बंदी हर्बल गुलाल नहीं बना पाए हैं। न ही ढोलक की थाप सुनाई दे रही है।

जिला जेल में बाहरी दुनिया से दूर करीब वर्तमान समय में करीब 1130 बंदी और कैदी अपने गुनाहों की सजा काट रहे हैं। दिवाली, होली हो चाहे ईद। इन सभी त्योहारों पर जेल प्रशासन जेल मैनुअल के मुताबिक ही बंदियों और कैदियों को त्योहार मनाने की आजादी देता है। उनके खाने-पीने की भी विशेष व्यवस्था की जाती है। खास तरह के पकवान बनाए जाते हैं। 

होली के त्योहार में तीन दिन बाकी हैं। पिछले कुछ सालों में होली के नजदीक आते ही जेल के बाहर ही नहीं अंदर भी एक उमंग का माहौल रहता था। इसकी वजह है कि तमाम नियम-कानूनों की बंदिशों और अनुशासन के बीच कम से कम उन्हें एक दिन ही खुशियां मनाने का मौका मिलता था। लेकिन सींखचों के पीछे अपने गुनाहों की सजा काट रहे बंदियों और कैदियों में पिछले सालों की तरह खुशियां मनाने की जगह निराश होना पड़ रहा है। 

जेल प्रशासन इस बार कोई खास ढील देने के मूड में नहीं दिख रहा है। पिछले साल जेल प्रशासन की अनुमति लेकर सात कैदियां और बंदियों ने मिलकर सब्जियों में अरारोट मिलाकर हर्बल गुलाल तैयार किया था, जो ईको फ्रेंडली के साथ ही त्वचा के लिए भी अनुकूल है। बंदी और कैदियों ने जेल में ही तैयार किए गए इस हर्बल गुलाल से जेल के माहौल को रंगीन बनाया था।

होली गीत गाने की इच्छा जताने पर जेल प्रशासन ने उन्हें वाद्ययंत्र भी उपलब्ध कराएं थे। बंदी और कैदी टोली बनाकर जेल में ढोलक की थाप और मजीरे की तान पर होली गीतों को गाने का अभ्यास करते थे। इससे ढोलक की थाप जेल की दीवारों के बाहर तक सुनाई पड़ती थी।

जेल प्रशासन तैयारियों के लिए उन्हें सिर्फ एक घंटे का ही समय देता था, लेकिन इस बार बंदी खुद के बनाए गए हर्बल रंगों से होली का जश्न नहीं मना पाएंगे। इसकी वजह है कि जेल प्रशासन ने उन्हें हर्बल रंग बनाने के लिए सब्जी और अरारोट भी उपलब्ध नहीं करा सका है। न ही बंदियों और कैदियों को होली गीतों का अभ्यास करने की कोई छूट दी है।

गाजर, चुकंदर और पालक की व्यवस्था नहीं है। इसलिए इस बार हर्बल रंग जेल में तैयार नहीं हो सका है। किसी भी बंदी और कैदी ने होली गीतों के अभ्यास के लिए कोई जिज्ञासा नहीं जाहिर की है। पर्व को देखते हुए बंदियों और कैदियों को विशेष पकवान दिया जाएगा---हरबंश कुमार पांडेय, जेलर।

यह भी पढ़ें- लखीमपुर-खीरी: एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते एडीओ पंचायत को रंगे हाथ दबोचा, रिपोर्ट दर्ज

संबंधित समाचार