1952 में 3.4 लाख वोटर से बरेली संसदीय क्षेत्र की हुई थी शुरुआत, अब 18 लाख का आंकड़ा पार

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अनुपम सिंह, बरेली। बरेली संसदीय क्षेत्र की शुरुआत 1952 में सिर्फ तीन लाख 41 हजार वोटरों के साथ हुई थी जो अब 18 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। यह भी आंकड़ा दिलचस्प है कि पहले चुनाव में विजयी प्रत्याशी को कुल मिलाकर जितने वोट मिले थे, पिछले दो चुनाव में हार-जीत का अंतर ही उससे चार गुना ज्यादा पहुंच चुका है।

आजादी के बाद 1952 में देश के पहले आम चुनाव में बरेली संसदीय क्षेत्र की पहचान बरेली साउथ सीट के नाम से थी। आंवला और बहेड़ी भी इस संसदीय क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद मतदाताओं की संख्या तीन लाख 41 हजार 976 थी। चुनाव में 1,29,142 लोगों ने ही मतदान किया था। इसमें 66,740 वोट पाकर सतीश चंद्र पहले सांसद चुने गए थे। 

1957 में चार लाख तीन हजार 446 मतदाता हो गए। इस चुनाव में एक लाख 86 हजार 971 वोट पड़े। सतीश चंद्र 94727 वोट पाकर दूसरी बार संसद पहुंचे। परिसीमन के बाद 1967 में भारी वृद्धि के साथ मतदाता संख्या पांच लाख 13 हजार 149 पर पहुंच गई। चुनाव में दो लाख 82 हजार 35 वोट पड़े जिनमें से एक लाख 12 हजार 698 वोट पाकर बीबी लाल सांसद बने।

पांचवीं लोकसभा के लिए 1971 में हुए चुनाव में पांच लाख 49 हजार 804 वोटर हो गए। इसमें से दो लाख 33 हजार 418 वोट पड़े और एक लाख 15 हजार 495 वोट पाकर सतीश चंद्र तीसरी बार संसद पहुंचे। इसके बाद 1977 में राममूर्ति सांसद बने। इस चुनाव में पांच लाख 80 हजार 11 वोटर थे। वोट पड़े तीन लाख 461 वोट पड़े, राममूर्ति को एक लाख 96 हजार 147 वोट मिले। 1980 में मध्यावधि चुनाव हुआ था। 1984 का चुनाव बेगम आबिदा अहमद ने जीता। वोटर बढ़कर छह लाख 56 हजार 877 हो गए थे। इसमें तीन लाख 26 हजार 169 वोट पड़े जिसमें से आबिदा को एक लाख 56 हजार 904 वोट मिले।

इसके बाद 1989 में वोटर आठ लाख 14 हजार 530 थे जिसमें पड़े थे चार लाख 41 हजार 446। एक लाख 59 हजार 502 वोट पाकर संतोष गंगवार ने पहली बार सांसद बने। 1991 के चुनाव में आठ 22 हजार 940 वोटर हो गए। चुनाव में चार लाख 39 हजार 997 वोट पड़े और दो लाख 32 हजार 18 वोट पाकर संतोष दोबारा संसद पहु़ंचे।

1996 में बरेली वोटरों की संख्या ने 10 लाख का आंकड़ा पार किया। दस लाख नौ हजार 939 में से चार लाख 87 हजार 473 ने वाेट डाले और दो लाख 25 हजार 285 वोट पाकर संतोष तीसरी बार जीते। 1998 में दस लाख 21 हजार 105 में से पांच लाख 67 हजार 219 वोट पड़े। संतोष को तीन लाख 14 हजार 480 वोट मिले।

इसके बाद 1999 में दस लाख आठ हजार 983 वोटर हुए जिनमें पांच लाख 92 हजार ने वोट डाला और संतोष को दो लाख 92 हजार 813 वोट दिए। 2014 में वोटर फिर बढ़कर 16 लाख 64 हजार 81 हो गए। इनमें पांच लाख 18 हजार 258 वोट संतोष को मिले। 2019 में 17 लाख 97 हजार 655 वोटर थे जिनमें से पांच लाख 65 हजार 270 ने संतोष को वोट देकर जिताया। 2024 के चुनाव में 18 लाख दो हजार 381 मतदाताओं को प्रत्याशी चुनना है।

दो चुनावों में बढ़ने के बजाय घट गए वोट
बरेली में दो चुनाव ऐसे भी हुए जब वोट बढ़ने के बजाय कम हो गए। 1957 के चुनाव में चार लाख तीन हजार 446 वोट थे लेकिन 1962 में हुए चुनाव में घटकर तीन लाख 95 हजार 128 रह गए। इनमें से एक लाख 98 हजार 322 ने वोट डाले। इस चुनाव में 68,563 वोट पाकर ब्रजराज सिंह आछू बाबू चुने गए। इसके बाद कांग्रेस के प्रवीण सिंह ऐरन 2009 में चुनाव जीते तब भी वोटर 15 लाख 56 हजार 24 से घटकर 14 लाख एक हजार 423 रह गए थे। इनमें से दो लाख 26 हजार 976 वोट ऐरन को मिले।

करीब पांच लाख... सबसे ज्यादा वृद्धि 2004 में
लोकसभा के लिए 2004 में हुए चुनाव में बरेली में अप्रत्याशित तौर पर पांच लाख वोटर बढ़े। कुल वोटर 15 लाख 56 हजार 24 हो गए। इसमें दो लाख 69 हजार 65 वोट संतोष को मिले। इससे पहले 1999 में दस लाख आठ हजार 983 वोटर ही थे।

सर्वाधिक वोटाें से जीतने का रिकॉर्ड संतोष के नाम
आजादी के बाद बरेली में 17 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड संतोष गंगवार के नाम है। पहले चुनाव में एक लाख 95 हजार वोट पाकर सांसद बनने वाले संतोष गंगवार को 2019 में अपने नौवें चुनाव में पांच लाख 65 हजार 270 वोट मिले थे।

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