UP: बसपा के लिए कास्ट केमिस्टी भुना पाने की राह होगी मुश्किल...वर्ष 2004 में ब्रजेश पाठक ने BSP की झोली में डाली थी सफलता
बसपा के लिए कास्ट केमिस्टी भुना पाने की राह होगी मुश्किल
उन्नाव, अमृत विचार। जिले से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने के बाद भी बसपा के लिए सन-2004 के लोकसभा चुनाव के परिणाम को दोहरा पाना मुश्किल माना जा रहा है। पार्टी की ओर से अशोक पांडेय को प्रत्याशी घोषित किया गया है। वे इस बार जीत का दंभ भी भरते नजर आ रहे हैं। हालांकि शहर सहित कस्बाई व ग्रामीण क्षेत्र में अधिक प्रचार न दिखने से विपक्ष के साथ आम आदमी भी सजातीय सहित कैडर वोट बैंक को लामबंद कर पाना असंभव बताया जा रहा है।
प्रदेश के मौजूदा उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस संसदीय सीट पर सन-2004 में बसपा का कब्जा कराने में सफलता पाई थी। इस बार बसपा ने फिलहाल चुनावी कास्ट केमेस्ट्री को भुनाने के लिए एक बार फिर ब्राह्मण चेहरे के तौर पर अशोक पांडेय को मैदान में उतारा है। शुरुआती दौर में जिले के अधिकांश लोग बसपा को तीसरे पायदान की पार्टी बता रहे हैं।
इसके पीछे सत्तारूढ़ दल की योजनाओं से सर्वाधिक बसपा व सपा के वोट बैंक के लाभांवित होने का तर्क दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि मौजूदा डिप्टी सीएम ने बसपा से प्रत्याशी घोषित होने से करीब एक साल पहले से ही जिले में राजनीतिक जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी। साथ ही उम्मीदवार बनते ही प्रचार अभियान भी शुरू किया था।
वहीं दूसरी ओर अब प्रत्याशिता तय होने के कई दिन बाद भी कहीं कोई प्रचार नहीं दिख रहा है। इसके अलावा लोग डिप्टी सीएम व वर्तमान प्रत्याशी के आयु वर्ग के अंतर को भी तुलना का आधार बना रहे हैं। उनका कहना है कि सन-2004 में बसपा प्रत्याशी ने जिले की खाक छानते हुए बिना सफलता की दहलीज में कदम रखा था। यही नहीं ब्रजेश पाठक छात्र राजनीति करते हुए लोकसभा उम्मीदवार बने थे, जबकि मौजूदा प्रत्याशी पत्रकारिता जगत के अलावा समाजसेवा में भी तत्पर हैं। इसके बाद भी यह राह उनके लिये आसान नहीं दिख रही है।
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