Holi 2024: देवा में उड़ते हैं कौमी एकता व आपसी सद्भाव के रंग
देवा/ बाराबंकी, अमृत विचार। कस्बा देवा स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर सभी धर्मों के लोग फूलों और गुलाल से जमकर होली खेलते हैं। सौहार्द के इस नजारे का दीदार करने के लिए देश के कोने -कोने से लोग आते हैं देवा शरीफ की होली अवध की शान कही जाती है।
सूफी संत हाजी वारिस अली शाह नें दुनिया को भाईचारे और साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया है। 'जो रब है वही राम है' के माध्यम से उन्होनें ईश्वर एक है का संदेश दिया। उनके चाहने वालों में सभी धर्मों के लोगों की संख्या बहुतायत है। मान्यता है कि सरकार वारिस पाक अपने जीवन काल मे होली के दिन कस्बे में रुककर अपने चाहने वालों को दर्शन देते थे और उनके साथ होली भी खेलते थे। उनके दरबार में यह परंपरा आज भी बरकरार है। करीब तीन दशकों से यहां की होली के आयोजन की कमान वारसी होली कमेटी देवा के अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी के हाथ में हैं। कमेटी में करीब एक दर्जन लोग हैं, जो होली का जुलूस का आयोजन करती है। कौमी एकता गेट पर फूलों की होली के बाद चांचर जुलूस गाजे-बाजे के साथ रवाना होता है। जिसका नेतृत्व मौजूदा चेयरमैन करते आ रहे हैं। कस्बे से होता हुआ जुलूस जब आस्ताने पर पहुंचता है तो यहां का नजारा अलौकिक होता है।
पूरा परिसर अबीर- गुलाल की सतरंगी बादलों की छटा में डूब जाता है। होलियारों की टोली में शामिल होकर जायरीन और फुकरा (सन्त) भी जमकर अबीर उड़ाते हैं। अपने पीर के दरबार मे होली खेलकर हर कोई खुद को धन्य मानता है और सद्भाव का दुर्लभ नजारा देखकर आनंदित हो उठता है।
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