बरेली: न सख्ती न पहरेदार, हॉटस्पॉट अभी भी बरकरार

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। कोरोना की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय और शासन के आदेश पर हॉटस्पॉट यानी कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे। इनमें किसी तरह की छूट न तो लॉकडाउन में थी और न ही अनलॉक में दी गई है। कोरोना के मरीज अलग-अलग क्षेत्र में लगातार मिल रहे हैं। उसी आधार पर …

बरेली,अमृत विचार। कोरोना की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए गृह मंत्रालय और शासन के आदेश पर हॉटस्पॉट यानी कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे। इनमें किसी तरह की छूट न तो लॉकडाउन में थी और न ही अनलॉक में दी गई है। कोरोना के मरीज अलग-अलग क्षेत्र में लगातार मिल रहे हैं। उसी आधार पर हॉटस्पॉट भी बनाए जा रहे हैं लेकिन मौजूदा दौर में पुलिस-प्रशासन हॉटस्पॉट बनाने और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। न कोई सख्ती की जा रही है और न ही कोई निगरानी की जा रही है।

यही वजह है कि सिविल लाइंस, बिहारीपुर, रामपुर गार्डन समेत कई ऐसी जगह हैं जहां जून व जुलाई से हॉटस्पॉट बने हुए हैं। कोरोना मरीज आने पर 21 दिन में हॉटस्पॉट खत्म हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। कुछ एरिया में हॉटस्पॉट खत्म होकर दोबारा बन गए लेकिन कागजों में अभी भी हॉटस्पॉट जारी है। पिछले करीब एक महीने से शासन को हॉटस्पॉट की संख्या 149 ही भेजी जा रही है और इसमें कोई अंतर नहीं आ रहा है। इससे तो यही लग रहा है कि अब जिम्मेदार कागजों में हॉटस्पॉट बनाकर भूल जा रहे हैं।

सिर्फ सुभाषनगर में दिखी थी सख्ती
बरेली में कोरोना का पहला मरीज सुभाषनगर में आया था। इसके बाद उसके परिवार के 5 अन्य सदस्य भी संक्रमित हो गए थे। इसी वजह से पहला हॉटस्पॉट भी सुभाषनगर को बनाया गया था। जब यह हॉटस्पॉट बना था तो इतनी सख्ती थी कि यहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। यही वजह थी कि यहां के लोग हॉटस्पॉट खत्म होने का इंतजार करने लगे थे। तत्कालीन नियमानुसार 28 दिन बाद हॉटस्पॉट खत्म हुआ था। इसके बाद से हॉटस्पॉट को लेकर लगातार ढिलाई बरती जा रही है। जब कोरोना के मरीज बढ़े तो शासन की सख्ती के बाद पुलिस और प्रशासन के लोग हॉटस्पॉट में दौड़ लगाते नजर आए। उसके बाद नतीजा वही ढाक के तीन पात हो गया। जैसे-जैसे अनलॉक में छूट मिलती गई, वैसे-वैसे हॉटस्पॉट भी सिर्फ कागजों में बनते चले गए और अब तो हॉटस्पॉट कागजों से भी खत्म नहीं हो रहे हैं।

22 जून का सबसे पुराना हॉटस्पॉट
शासन को भेजी जाने वाली हॉटस्पॉट की रिपोर्ट के आधार पर देखा जाए तो 22 जून को शाहबाद में हॉटस्पॉट बनाया गया था जो अभी भी बरकरार है। इसी तरह से बिहारीपुर करोलान को 24 जून, रामपुर गार्डन को 30 जून, रामपुर गार्डन को 30 जून को हॉटस्पॉट बनाया गया था जो अभी तक खत्म नहीं हुआ है जबकि इन सभी जगहों को नए नियमों के तहत 21 दिन से भी अधिक हो गए हैं। चार महीने बाद भी हॉटस्पॉट खत्म न होना, कहीं न कहीं सवाल तो खड़े ही करता है कि इन हॉटस्पॉट को क्यों खत्म नहीं किया गया है।

इसी तरह से जुलाई माह में सिविल लाइंस, राजेंद्र नगर, शास्त्री नगर, कोहाड़ापीर, विष्णुपुरी, प्रभात नगर, गुलमोहर पार्क समेत करीब 60 से अधिक हॉटस्पॉट हैं जो अभी भी बरकरार हैं। इसके अलावा अगस्त में भी बने कई हॉटस्पॉट अभी भी चल रहे हैं। इसके अलावा सितंबर माह में एक दर्जन से कम ही हॉटस्पॉट बने हैं। इससे एक बात यह भी कही जा सकती है कि या तो हॉटस्पॉट को समाप्त नहीं किया गया या फिर यहां मरीज लगातार आ रहे हैं।

आंकड़ों पर एक नजर
149- हॉटस्पॉट
10559- मकान हॉटस्पॉट एरिया में
58971- लोग हॉटस्पॉट एरिया में रहते हैं
369- बैरियर लगाए गए

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