Chitrakoot: सौहार्द्र के माहौल में धूमधाम से मना रंगों का त्यौहार; गले लगाकर गुझिया खिलाकर लोगों ने दी एकदूसरे को बधाई
चित्रकूट, अमृत विचार। रंगों का त्यौहार होली जिले में धूमधाम और सौहार्द्रपूर्ण माहौल में मनाया गया। रविवार रात होलिका दहन के बाद लोगों ने एक दूसरे को पर्व की बधाई दी और फिर होली खेली। जिले में निर्धारित स्थानों पर होलिका दहन हुआ। कहीं से किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है। सोमवार को मऊ व वहां के कई गांवों को छोड़कर अन्य स्थानों में धूमधाम से त्यौहार में रंग खेला गया। गुझिया आदि पकवान खाए खिलाए गए।
मऊ संवाददाता के अनुसार, यमुना की तराई में बसे कौशांबी जिले के बारह गांवों व विकास खंड मऊ अंर्तगत 12 गावों में सोमवार को होली नहीं खेली गई। यहां दूसरे दिन होली खेलने की परंपरा है। रविवार की रात यहां पर होलिका दहन तो हुआ, लेकिन सोमवार को बैजला रहा मतलब होली नहीं खेली गई। यहां मंगलवार को होली मनाई गई।
बैजला को लेकर हैं कई किंवदंतियां
क्षेत्र के ग्रामीण अंचल की परंपराओं पर बारीक नजर रखने वाले युवा पत्रकार अभिनव राज त्रिपाठी ने बताया कि बैजला के संदर्भ में लोगों के बीच तरह तरह की किवदंतिया हैं। बड़े बुजुर्ग बैजला पर तरह तरह की बातें बताते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अंग्रेजों के शासन काल में मऊ के जमींदार बैजनाथ तिवारी की होली के ही दिन मौत हो गई थी तो कुछ लोगों का कहना है कि तिवारी जमींदारी के विश्वासपात्र बैजू नाम के एक व्यक्ति थे, जो फाग बहुत अच्छा गाते थे।
किसी कारणवश इनकी आकस्मिक मृत्यु हो गई तो बैजू के घरवालों ने जमींदार से उनकी याद में कुछ अलग करने का निवेदन किया जिसे मानते हुए जमींदार ने, जिसकी 24 गांवों मे जमींदारी थी, होली के दिन रंग न खेल के अगले दिन रंग खेलने की परंपरा डाल दी। कौशांबी जनपद में गढ़वा, हिसामबाद, गौरए, गोपसहसा, मुडिया डोली, दाई का पूरा, बस्ती तालाब, चांदकन, गुरौली, बेरौचा, जुगराजपुर, सोनवारा, महिला व चित्रकूट के 12 गांवों मऊ, मवई कला, मंडौर, ताड़ी, बरवार, बसरेही, छिवलहा, पटोरी, कालूराम का पुरा, बबुंरा, पियरिया कला, नौबस्ता के लोग पूर्वजों की परंपरा का आज भी निर्वहन करते हैं।
