दशरथ घर जन्मे ललनवा हो रामा... कबीर, तुलसी के भजनों से गूंजा तुलसी मंच
अयोध्या, अमृत विचार। रामोत्सव के अंतर्गत तुलसी उद्यान में चल रहे भक्तिपरक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सोमवार शाम प्रभु राम के मोहक स्वरूप से लेकर उनके निराकार रूप का स्मरण गीत, संगीत, नृत्य के माध्यम से किया गया।
प्रयागराज से आए ओम प्रकाश पटेल के दल ने कोई करे ना गुमान इस तन पर गाकर निर्गुण भक्ति का वातावरण बना दिया। भक्ति की प्रथम योग्यता सत्संग को निरूपित करते हुए गाया ऐ मेरे दोस्त सत्संग करना, कुसंगत है दोष इसके बाद आइहे पिया लई के डोली कहार से जीवन की नश्वरता का भान कराया। अपने श्वेत परिधान और प्रस्तुति से दर्शकों को मोहने वाले इस दल में संगतकार प्रेम प्रकाश ढोलक पर, हारमोनियम पर सूर्य प्रकाश, करताल पर दूधनाथ, और मंजीरे पर जय प्रकाश थे। सहगायक दिवाकर पटेल ने साथ दिया।बस्ती से आयी प्रज्ञा त्रिपाठी ने व्यक्त किया साझे धन सुतली अटारिया से। अगले सोहर में दशरथ घर जन्मे ललनवा से।
सोहर के बाद नितान्त पारंपरिक जीरा गीत जो प्रसव उपरांत गाया जाता है। गलिन गलिन जीरा वाला फिरे गाकर सभी को मुग्ध कर दिया। काहे का रोवे है ललनवा, खिलौना गीत गाकर कलाकार ने वातावरण में रामलला के बाल रूप का दर्शन करा दिया। लखनऊ से आईं प्रियंका पांडेय के दल ने इसके बाद सुंदर पारंपरिक सोहर, चैती, बधाइयां, होली गाकर पूरे वातावरण को राममय कर दिया। संचालन आकाशवाणी के उद्घोषक देश दीपक मिश्र ने सधे अंदाज में किया। उप्र लोक जनजाति एवम संस्कृति संस्थान लखनऊ के निदेशक अतुल द्विवेदी के निर्देशन में कलाकारों का सम्मान स्मृति चिह्न प्रदान कर अतुल कुमार सिंह में किया।
ये भी पढ़ें -हर चुनौती को दूर कर पढ़ाई जारी रखें छात्राएं :श्रम अधिकारी
