आखिर कब तक
सोमवार को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में उन दो आतंकियों को मार गिराया जो हाल ही में सीआरपीएफ जवानों पर हमले में शामिल थे। जम्मू-कश्मीर में लगातार हमारी सेना आतंकियों का सफाया कर रही है, मगर पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से घाटी को हमेशा ही सुलगाए रखना चाहता है। यही वजह है …
सोमवार को सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में उन दो आतंकियों को मार गिराया जो हाल ही में सीआरपीएफ जवानों पर हमले में शामिल थे। जम्मू-कश्मीर में लगातार हमारी सेना आतंकियों का सफाया कर रही है, मगर पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से घाटी को हमेशा ही सुलगाए रखना चाहता है। यही वजह है कि वह सीमा पार से लगातार आतंकी घुसपैठ कर हमारी सीमा और घाटी के भीतर आतंक फैलाए हुए है।
आतंकवादियों से टक्कर लेने के साथ ही पाकिस्तान के साथ हमारा देश कूटनीतिक स्तर पर भी लगातार मोर्चा लेकर उसे अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में बेनकाब कर रहा है। मगर इस सबके बीच संयुक्त राष्ट्र का रवैया पाकिस्तान के प्रति कभी भी ऐसा नहीं रहा जिससे यह साबित हो सके कि आतंक को पनाह देने वाले देश के खिलाफ यूएन किसी प्रकार की कोई ऐसी कार्रवाई करता है, जिससे आतंक की फैक्ट्री का अंत हो सके।
सालों से सीमा पार से पाकिस्तान न केवल भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है बल्कि दुनियाभर में हो रहे तमाम आतंकी वारदातों के पीछे भी संबंध कहीं न कहीं पाकिस्तान में पनाह ले चुके आतंकियों से जरूर मिलते हैं। सारी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकवाद की फैक्ट्री चलाता है, मगर उसके खिलाफ किसी भी तरह का कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया गया है। जाहिर है, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संगठन की जवाबदेही और उसकी मंशा के प्रति संदेह पैदा होता है। शायद यही वजह रही है कि प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र को सही आईना दिखाते हुए उसके पुनर्गठन और उसमें बड़े बदलाव जैसा मुद्दा उठा दिया था।
घाटी में आतंकी हरकतों के चलते हमारे सैनिक आए दिन शहीद होते आए हैं। हालांकि हर बार हमारी सेना ने दुश्मन को करारा जवाब देते हुए आतंकियों को न केवल परास्त किया बल्कि उन्हीं के घर जाकर उन्हें ढेर भी किया है। मगर इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब अंतर्राष्ट्रीय मंच से पाकिस्तान को यह कड़ा संदेश जाए कि उसकी आतंकी गतिविधियों का अंत होना होगा, अन्यथा उसे कड़े अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। भारत के परिप्रेक्ष्य में संयुक्त राष्ट्र को यह जरूर सोचना होगा कि उसने सैकड़ों बार पाकिस्तानपरस्त आतंक के ठोस सबूत दुनिया के सामने रखे हैं।
पाकिस्तान अपने एजेंडे के तहत आतंक से पीछे इसलिए नहीं हट सकता क्योंकि वह घाटी को हमेशा अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में चर्चा में रखना चाहता है। लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी ही इस बात पर विचार करे कि पाकिस्तान के इस आतंकी एजेंडे को किस तरह समाप्त किया जाए, अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब भारत को खुद अपने स्तर से फैसला लेकर आतंक के सफाए के लिए बड़ा कदम उठाना पड़ेगा।
