हरदोई: बीमार युवक की हुई मौत, गरीबी और तंगहाली बताई जा रही वजह  

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Edited By Amrit Vichar
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हरदोई, अमृत विचार। ग़रीबी ऐसी कि जीते-जी साथ रही और मरने के बाद भी साथ नहीं छोड़ा। पांच साल से बिस्तर पर घुट-घुट कर जी रहे युवक ने आखिर ज़िंदगी से हार मान ली। तंगहाली क्या होती है ? उसके आस-पड़ोस वालों ने बड़ी नज़दीकी से देखा,उन्ही लोगो ने आगे बढ़ कर उसके कफन-दफन का बंदोबस्त कराया।

बात की जा रही शाहाबाद के मोहल्ला खत्ता जमाल खां के 35 वर्षीय प्रदीप पुत्र श्याम बहादुर की,प्रदीप पांच साल से बीमार चल रहा था। पत्नी भी बीमार रहने लगी। खाने के लिए नहीं था,तो इलाज कैसे हो पाता,इसी के चलते तीन साल पहले प्रदीप की पत्नी की मौत हो गई थी।पत्नी के न रहने के बाद प्रदीप और टूट चुका था। उसकी भूख-प्यास सब खत्म हो चुकी थी। वह बिस्तर पर पड़े-पड़े घुट-घुट कर जी रहा था। प्रदीप के भाई पप्पू ने बताया कि गुरुवार को तबियत और बिगड़ गई,खून की उल्टी होते ही उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। सीएचसी ले जाया गया तो वहां के डाक्टर सॉरी बोलने के अलावा और कुछ नहीं कर सके। घर में तंगहाली इतनी थी कि प्रदीप के कफन-दफन होना मुश्किल हो रहा था,जिस पर पड़ोसियों ने कुछ पैसे जोड़ कर उसके कफन-दफन का बंदोबस्त कराया।

ज़िंदगी जीने की खत्म हो चुकी थी आस
शाहाबाद सीएचसी के डाक्टरों को लगा कि प्रदीप की मौत सस्पेक्ट प्वाइजनिंग की वजह से हुई। उसी के चलते पुलिस ने सीएचसी की तरफ से भेजी गई सूचना पर शव को अपने कब्ज़े में ले कर उसका पोस्टमार्टम कराया है। डाक्टरों का शक अगर सच निकला तो माना जाएगा कि सालों से बीमार पड़े प्रदीप‌ ने ज़िंदा रहने की आस छोड़ रखी थी और उसी के चलते  उसने कोई चीज़ खा कर घुट-घुट कर जी जा रही ज़िंदगी खत्म कर ली।

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