राहत और चुनौती

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना महामारी से चल रही जंग के बीच इधर के दिनों में संक्रमितों की संख्या में कुछ कमी भले ही राहत की तरफ इशारा कर रही हो मगर इस जंग में अभी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। इधर, लाकडाउन-5 के तहत 15 अक्टूबर से तमाम राज्यों में मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉल भी खुल रहे हैं, …

कोरोना महामारी से चल रही जंग के बीच इधर के दिनों में संक्रमितों की संख्या में कुछ कमी भले ही राहत की तरफ इशारा कर रही हो मगर इस जंग में अभी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। इधर, लाकडाउन-5 के तहत 15 अक्टूबर से तमाम राज्यों में मल्टीप्लेक्स और सिनेमा हॉल भी खुल रहे हैं, लिहाजा आवश्यकता और अधिक सावधान रहने की होगी। इधर त्योहारी सीजन भी शुरू हो रहा है और स्कूल, महाविद्यालय खोलने की कवायद भी शुरू हो चुकी है।

इन सबके बीच यह जरूरी है कि लोग कोरोना को लेकर बचाव के उपायों का अधिक से अधिक ध्यान रखें। देश में पिछले 12 दिनों में दूसरी बार सबसे कम संक्रमित मरीज सोमवार को दर्ज किए गए हैं। एक दिन में 55,342 नए मामले सामने आने के बाद इतना तो तय है कि कोरोना के मामलों में कमी जरूर है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग अभी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि मामले लगातार कम होंगे, स्थिर रहेंगे या फिर इनकी संख्या बढ़ेगी। दरअसल संक्रमण बढ़ने या कम होने को लेकर केवल अनुमान भर ही लगाया जा सकता है। अब चूंकि अनलॉक के आखिरी चरण में लाकडाउन की लगभग सारी बंदिशें खत्म हो जाएंगी, लिहाजा कोरोना संक्रमण के लिहाज से आने वाले कुछ महीनों को बहुत महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

हालांकि कोरोना के अब तक के मामलों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन यह कह चुका है कि भारत में कोरोना पीक पर है। यानी अब मामलों की संख्या घटनी ही है, ऐसा पक्के तौर पर कहना अभी जल्दबाजी ही होगी। देश में कई स्थानों पर ऐसा देखा गया जब वहां संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में होने के बाद अचानक ही संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े थे। दूसरी ओर विश्व भर में कोरोना वैक्सीन को लेकर भी तेजी से काम हो रहा है। मगर वैक्सीन आम आदमी की पहुंच में कब तक आ पाएगी, इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पहले तो अंतिम चरण के ट्रायल पूरे हों, उसके बाद वैक्सीनेशन शुरू भी हो तो सबसे पहले यह पहली पंक्ति के कोरोना योद्धाओं तक पहुंचेगी।

इसके बाद कई चरणों में वैक्सीनेशन की बात हो रही है। लिहाजा कहा जा सकता है कि वैक्सीन अभी बहुत दूर की बात है। ऐसे में कोरोना संक्रमण से बचाव और इसे रोकने के लिए खुद का बचाव ही एक मात्र साधन बचता है। इस बीच देखने में आया है कि मास्क लगाने और सामाजिक दूरी बनाने समेत विभिन्न सावधानियों को लेकर लोग कुछ लापरवाह से दिख रहे हैं, जो ठीक नहीं है। कोरोना रोकथाम को लेकर सरकार अपना काम कर रही है, मगर देश के नागरिकों को ही इस जंग में सबसे बड़ी भूमिका निभानी है। लिहाजा कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सावधानियों का इस्तेमाल कर लोग अपनी इस जंग में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका जिम्मेदारी से निभाएं तभी विजय संभव है।