बरेली: समय पर पुल निर्माण में सिस्टम फेल, अब संशोधित बजट का खेल

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। जाम से निजात दिलाने और सुगम यात्रा के लिए बनाए जा रहे शहर के तीन ओवरब्रिज के निर्माण की सुस्त रफ्तार से लोगों को कई सालों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, करोड़ों रुपये के रिवाइज्ड एस्टीमेट (संशोधित आगणन) से सरकारी खजाने पर जोर का झटका लगा है। महंगाई …

बरेली, अमृत विचार। जाम से निजात दिलाने और सुगम यात्रा के लिए बनाए जा रहे शहर के तीन ओवरब्रिज के निर्माण की सुस्त रफ्तार से लोगों को कई सालों से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, करोड़ों रुपये के रिवाइज्ड एस्टीमेट (संशोधित आगणन) से सरकारी खजाने पर जोर का झटका लगा है। महंगाई का तर्क देकर बढ़ाई गई करोड़ों की रकम जिम्मेदारों के लिए ‘टानिक’ का काम कर रही है।

शहर में इस समय सेटेलाइट पुल, आईवीआरआई पुल के निर्माण का कार्य अंतिम दौर में है। इन दिनों लाल फाटक पुल के निर्माण में तेजी आई है लेकिन तीन पुल निर्धारित समय से वर्षों देरी से पूरे होंगे। इसका असर सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर पड़ा है। साथ ही लोगों को आवागमन में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। कार्यदायी संस्था को शासन ने करोड़ों रुपये का संशोधित बजट दिया है।

इसके कारण निविदा के समय कम रेट पर भरे गए टेंडर से अधिक राशि आवंटित कर दिया गया है। पुल निर्माण विभिन्न कारणों से समय-समय पर बाधित होते रहे जिसके चलते मजदूरी, रेत, सरिया, गिट्टी के दामों में बढ़ोतरी का तर्क देकर सेतु निगम ने रिवाइज्ड एस्टीमेट बढ़ाया है।

आईवीआरआई पुल
इस पुल की मंजूरी सपा सरकार के शासन काल में मिली थी। देरी होने के कारण पुल का संशोधित बजट 54.67 करोड़ रुपये हो गया। इसमें सेतु निगम का अंश करीब 35.35 करोड़ रुपये है जबकि रेलवे को 19.31 करोड़ रुपये का बजट दिया जाना है। पहले यह आगणन केवल 38.23 करोड़ रुपये ही था। इस पुल को मार्च 2019 में ही तैयार हो जाना चाहिए था। पुल निर्माण अपने निर्धारित समय से करीब एक-डेढ़ साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। अब यहां सड़क निर्माण किया जा रहा है।

लाल फाटक पुल
शासन ने मार्च 2014 में लाल फाटक ओवरब्रिज निर्माण की मंजूरी दी थी। कांधरपुर बाजार से उठने वाले ओवरब्रिज को कैंट क्षेत्र में उतरना है। इसके लिए सेना की करीब 65 सौ वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है लेकिन सेना ने अब तक इसकी अनुमति नहीं दी है। इसे मार्च 2020 तक पूरा हो जाना चाहिए था। सेतु निगम वर्ष 2017 में कांधरपुर बाजार की ओर से निर्माण शुरू करा चुका है। पुल का कार्य समय से पूरा न होने से सवा 14 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च करने के बाद लाल फाटक रेलवे क्रासिंग का कार्य पूरा होगा। 955 मीटर लंबे इस पुल के लिए 2017 में 82 करोड़ 50 लाख रुपये मंजूर किए गए थे। अब 96 करोड़ रुपये का बजट पुल निर्माण के लिए दिया गया है। इसे रक्षा मंत्रालय से एनओसी मिलने का इंतजार है।

सेटेलाइट पुल
सेटेलाइट चौराहे पर अक्सर लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए शासन ने बरेली-लखनऊ रोड पर करीब 670 मीटर लंबा ओवरब्रिज मंजूर किया था। मार्च 2019 में करीब 26 करोड़ रुपये की लागत से सेटेलाइट फ्लाईओवर का निर्माण शुरू कराया गया था जो बाद में करीब 36 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यहां बिजली लाइन और पोल शिफ्ट करने के लिए बजट बढ़ गया। चौराहे के दोनों तरफ पुल बन चुका है लेकिन चौराहे के ऊपर से निकली हाईटेंशन लाइन को अब तक ऊंचा नहीं किया गया है। इसके लिए पावर कॉरपोरेशन ने सेतु निगम को करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये दिए हैं। इस पुल का कार्य लाकडाउन में तीन माह तक प्रभावित रहा है। इसके कारण पांच करोड़ रुपये की लागत बढ़ गई। इसके कारण 10 करोड़ रुपये लागत बढ़ गई है। अब 3651 लाख रुपये में पुल बन कर तैयार होगा। इस पुल को मार्च 2020 में तैयार हो जाना चाहिए था लेकिन अब तक नहीं हो सका।

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