Unnao News: छलावा साबित हो रहे ग्राम पंचायतों के आरआरसी सेंटर्स, स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जानी थी जिम्मेदारी
ब्लाक क्षेत्र की 36 ग्राम पंचायतों में हो चुका है निर्माण
उन्नाव, अमृत विचार। स्वच्छता अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तकर पर बनवाए गए तमाम आरआरसी सेंटर मात्र शोपीस साबित हो रहे हैं। लाखों रुपए बजट से निर्माण बनवा कर तैयार हुए सेंटर को उपयोग में न लाए जाने के सवाल पर सभी कन्नी काटने लगते हैं।
सफीपुर विकास क्षेत्र की खरगौरा समेत 36 ग्राम पंचायतों में बनवाए गए आरआरसी सेंटर अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। निर्माण कराते समय बताया गया था कि ग्राम पंचायत से निकलने वाला कूड़ा यहां एकत्र किया जाएगा। इन केंद्रों का संचालन स्वयं सहायता समूहों में शामिल महिलाओं द्वारा किया जाना था। खरगौरा सहित अन्य ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान व सचिव ने मिलकर निर्माण तो करा दिया, लेकिन मानक के मुताबिक निर्माण सामग्री का प्रयोग नहीं किया गया। साथ ही आमतौर पर आबादी से दूर निर्माण कराया गया है।
इससे जहां निर्माण पूरा होने के साथ ही यह जर्जर होते जा रहे हैं। ग्रामीण इन केंद्रों का अगले पांच साल में अस्तित्व समाप्त होने की आशंका जता रहे हैं। आरआरसी केंद्र निर्माण की योजना वास्तव में कागजी साबित होकर रह गई है। इसीलिए ग्रामीण घरों से निकलने वाला कूड़ा इधर-उधर फेंकने को मजबूर हैं, जिससे गांव में बनी नालियां प्रायः चोक रहती है।
इसलिए नालियों को पानी उफनाकर रास्तों पर भरता रहता है। यही नहीं कई स्थानों पर बजबजाती नालियां संक्रामक बीमारियों का कारण बनती हैं। बरसात के दिनों में हालात सबसे अधिक बदतर रहते हैं। गंदगी व जलजमाव की वजह से जहरीले कीड़े-मकौड़ों के घर पहुंचने का खतरा रहता है। इन सेंटर्स का संचालन न शुरू होने के संबंध में सवाल किए जाते ही जिम्मेदार कन्नी काट जाते हैं।
ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी से लेकर बीडीओ तक जवाब देने से बच रहे हैं। तमाम जद्दोजहद के बाद वह चुनाव के चलते व्यस्तता बताकर बाद में आरआरसी केंद्रों का निरीक्षण कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा देते हैं।
