Amrit vichar report: दर्द और दरिया के बीच इस बार भी मतदान करेंगे अंदपुर वासी

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साल भर पानी से घिरा रहता है असईपुर ग्राम सभा का गांव, नाम मात्र की है सुविधाएं, समस्याओं के हैं बड़े अंबार

जीशान कदीर/सीतापुर/लखनऊ, अमृत विचार। सूबे की राजधानी से सटे जनपद सीतापुर से करीब 90 किमी की दूर बिसवां तहसील और रेउसा ब्लॉक में स्थित चारों तरफ घाघरा और शारदा नदी के पानी से घिरा रहने वाला टापू अंदपुर इस बार भी मतदान की बाट जोह रहा है। समस्याओं से घिरे मतदाता 13 मई को नांव के सहारे मतदान केंद्र पहुंचकर मतदान करेंगे।

अंदपुर गांव असईपुर ग्राम सभा का मजरा है। 900 से अधिक आबादी वाले गांव के धनीराम, चन्द्रभाल, राजाराम बताते हैं कि बाढ़ के हालातों में गांव के लोगों की समस्या बढ़कर दोगुनी हो जाती है। ऐसे में लोगों के पास जीविकोपार्जन के लिए सिर्फ और सिर्फ रेत है। इसमें कुछ अनाज उगाते हैं, तो कुछ पशुपालन कर जीवन यापन भी करते हैं। गांव में जाने के लिए पहले नाव का सहारा लेना पड़ता है, उसके बाद तीन किलोमीटर पैदल भी चलना होता है। ग्रामीणों की मानें तो प्रतिदिन सुदूर क्षेत्रों में जाकर मजदूरी करना संभव नहीं है। गांव के लोग रुपयों को इतना महत्व नहीं देते हैं। क्योंकि आमदनी न होने के कारण पैसों की समस्याएं रोजाना बनी रहती हैं। ऐसे में दुकानों पर सामान के बदल गल्ला देना मजबूरी है।

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शासन की ओर से गांव में बिजली की व्यवस्था तो कराई गई है, लेकिन साल में करीब आठ माह गांव वालों को बिना बिजली के अपने इंतजाम पूरे करने होते हैं। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अरविंद वाजपेई बताते हैं कि विद्युत आपूर्ति लखीमपुर जनपद से आई है, लेकिन 12 माह के दौरान करीब आठ माह गांव वालों को बिन बिजली ही दिन-रात काटने पड़ते हैं। अधिकारियों से बात की जाए तो वे कहते हैं तार के सहारे जमीन में करंट न उतर आए, इसलिए व्यवस्था बाधित की जाती है। 

गांव की आबादी करीब 900 से अधिक है। इसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। मतदाता की बात करें तो यहां पर करीब 300 से अधिक मतदाता हैं। अपनी समस्याओं को लेकर इस गांव के लोग जल सत्याग्रह भी कर चुके हैं बावजूद हालात जस के तस हैं। गांव के धर्मपाल, कल्लू, सुखई और मनीजर का कहना है कि हर बार की तरह इस बार भी वह सब नाव के सहारे दरिया को पार कर अपना पसंदीदा प्रत्याशी चुनने के लिए मतदान करेंगे। 

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प्राथमिक विद्यालय तो है लेकिन बंद रहता है
शारदा और घाघरा नदियों से घिरे गांव में प्राथमिक विद्यालय तो है, लेकिन अक्सर बंद रहता है। ये दावा ग्रामीणों का है। गांव के रवि, श्याम, सोनू बताते हैं कि उनकी पढ़ाई कक्षा पांच के बाद बंद हो गई। क्योंकि आगे की पढ़ाई को पूरा करने के लिए नदी पार करनी पड़ती, ऐसे में समस्याओं के चलते दूसरे गांव नहीं जा सके।

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