बरेली: रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग में शिक्षक की नियमविरुद्ध नियुक्ति की शिकायत

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Edited By Amrit Vichar
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शासन ने विश्वविद्यालय से मांगी रिपोर्ट, फिलहाल कुलसचिव के स्तर पर मामला लंबित

बरेली, अमृत विचार। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के पादप विज्ञान विभाग में एक शिक्षक की नियमों के खिलाफ नियुक्ति करने का आरोप लगा है। एक पूर्व अस्थाई कर्मचारी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। कहा है कि शिक्षक विश्वविद्यालय के ही एक उच्चाधिकारी का काफी नजदीकी है। 19 दिन पहले की गई यह शिकायत फिलहाल कुलसचिव के स्तर पर लंबित दिख रही है। कुछ दिन पहले इतिहास विभाग में भी एक शिक्षिका की गलत तरह से नियुक्ति किए जाने की शिकायत की गई थी।

पूर्व कर्मचारी की ओर से की गई शिकायत में आरोप है कि पादप विज्ञान विभाग में तैनात एक सहायक आचार्य की विश्वविद्यालय परिनियमावली और यूजीसी के नियमों के विरुद्ध गलत ढंग से नियुक्ति की गई है। आरोप है कि शिक्षक ने यूजीसी नेट वर्ष 2014 में एग्रीकल्चर बायोटेक्नोलॉजी और सेट उत्तराखंड के लिए 2012 में पास किया जो चार साल के लिए ही बायोटेक्नोलॉजी विषय में मान्य होना चाहिए। आरोप है कि शिक्षक का 10 साल का अनुभव सहायक आचार्य के समकक्ष वेतनमान में नहीं है क्योंकि वह संविदा पर नियुक्त थे।

कहा गया है कि पूर्व सेवा का लाभ निरंतर सेवा पर ही अनुमन्य होता है जबकि शिक्षक का उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी से सीसीएस हरियाणा के कृषि विश्वविद्यालय के बीच सेवा परिवर्तन में सर्विस ब्रेक है। शिक्षक पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में पोस्ट डॉक्टोरल फेलो की तरह थे। शिक्षक के यूजीसी लिस्टेड जर्नल में निर्धारित अर्हता जो 10 रिसर्च पेपर की होती है, उससे कम रिसर्च पेपर प्रकाशित हैं लिहाजा उनका एपीआई कम है।

इसलिए शिक्षक की पादप विज्ञान विभाग में आचार्य पद पर नियुक्ति विधि सम्मत नहीं है। इसे निरस्त किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में सभी नियुक्तियां नियमों के तहत हुई हैं। शिकायत निराधार है और उसका जल्द निस्तारण कर दिया जाएगा।

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