पीलीभीत: घनी आबादी के बीच रातोंरात खाली प्लाट बना तालाब, फिर हो गए नर्क जैसे हालात

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत,अमृत विचार: इन दिनों संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बनी हुई है। जिसे देखते हुए साफ सफाई को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का पाठ लोगों को पढ़ाया जा रहा है। जिम्मेदार भी इसे लेकर व्यवस्था बेहतर बनाने के दावे भी कर रहे हैं, लेकिन धरातल की हकीकत इससे उलट है। आलम ये है कि घनी आबादी के बीच गंदगी और जलभराव से लोग बेहाल है, लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदार बेखबर। अभी कुछ दिन पहले ही मोहल्ला सुनगढ़ी की गलियों में जलभराव और गंदगी की तस्वीरें उजागर हुई थीं। 

 कुछ इसी तरह से अब हालात घनी आबादी वाले मोहल्ला नखासा में बन चुके हैं।  गंदगी के बीच संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। वहीं, कई फिट तक हुए जलभराव से बच्चों को लेकर हादसे का डर भी स्थानीय लोगों को सता रहा है। तीन दिन से हालात बदतर बने हुए हैं। नाला चोक होने की वजह से समस्या बताई जा रही है। मगर समाधान तो दूर की बात जिम्मेदार झांकते तक नहीं पहुंचे।

शहर के वार्ड नंबर एक के मोहल्ला नखासा में गांधी स्टेडियम के पीछे बसी बस्ती में करीब 100 से अधिक मकान बने हुए हैं। करीब एक हजार से अधिक लोग अपना जीवन यापन कर रहे हैं। मगर शहर में मिलने वाली सुविधा के नाम पर वहां कुछ नहीं है। स्थिति यह है कि वहां बने नालों की सफाई वर्षो से नहीं हुई है। जिस वजह से गदंगी के ढेर लगे हुए हैं। यहां पर एक खाली प्लाट पड़ा था। जिसमें बच्चे अक्सर क्रिकेट खेला करते थे। 

इसमें नाले का पानी भर गया है। शनिवार को  50 मिनट हुई बारिश के बाद नाले उफना गए और पानी ओवरफ्लो होने की वजह से बैक हो गए। जिस वजह से वहां खाली पड़े एक प्लाट में रातों रात चार फुट से अधिक गंदा पानी भर गया। मानों जैसे कोई तालाब बना हुआ है। पानी भरने की वजह से शनिवार को सड़क पर भी पानी आ गया था, जोकि निकल गया। 

मगर प्लाट में भरा गंदा पानी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। जिसमें मच्छर समेत अन्य कीड़े पनप रहे हैं। वहीं गंदे पानी से उठने वाली दुर्गंध से वहां से निकला ही दूभर है।  लोग घरों के खिड़की दरवाजे बंद करके बचाव करने पर मजबूर हैं। यह हाल तब है जब शहर में संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन कोई भी जिम्मेदार अभी तक झांकने नहीं पहुंचा। सफाई नायक भी सिर्फ नालियों और सड़क पर झाड़ू लगवाने तक ही सीमित रह गए हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो यह समस्या कई सालों से चल रही है। विरोध के बाद टीम आती है, मगर आश्वासन देकर चली जाती है।

खाली प्लॉट और गड्ढों में जलभराव से हो चुके हैं हादसे
इस तरह से खाली पड़े प्लॉट और गड्ढों में जलभराव के बाद कई बार जनपद में दुखद हादसे हो चुके हैं।  अभी बीते साल ही अमरिया क्षेत्र में खनन के बाद छोड़े गए गड़्ढे में भरे पानी में गिरकर तीन मासूमों की मौत हो गई थी। जिसके बाद एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।  

इससे पहले 2018 में शहर से सटे ग्राम बरहा में एक खाली जगह में जलभराव के बाद चार बच्चों की डूबकर मौत हो गई थी। इसके अलावा भी कई हादसे हो चुके हैं। मोहल्ला नखासा में भी जिस स्थान पर जलभराव है, वह घनी आबादी क्षेत्र है।  ऐसे में लोगों को हादसे का डर बना हुआ है।

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