पीलीभीत: कागजों में इंतजाम...हर तरफ जाम, रूट तय होने के बाद भी नो-एंट्री जोन में दौड़ रहे ई-रिक्शा
पीलीभीत, अमृत विचार। शहर की सड़कों को जाम से मुक्त कराने के लिए अधिकारियों की ओर से की गई कवायद एक बार फिर कागजों में सुधार के लिए के लिए चलाए गए तीर के समान दिखाई दी। जाम की मुख्य वजह मानते हुए ई-रिक्शा का रूट तो कागजों में तय कर दिया और बड़े-बड़े दावे भी कर गए। मगर धरातल पर हालात पूर्व की भांति जस के तस दिखाई दिए। मुख्य मार्गों पर ही नहीं नो एंट्री जोन में भी दिनभर भीड़ के बीच ई-रिक्शा दौड़ते नजर आए। कई बार जाम के हालात भी बने। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस जाम में फंसकर राहगीर परेशान होते रहे और जिम्मेदार हर बार की तरह नदारद थे।
वैसे तो शहर की यातायात व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है। इसका सुधार करने के लिए कई बार पुलिस प्रशासनिक और परिवहन विभाग के अधिकारी मिलकर मंथल कर चुके हैं। तमाम रणतियां भी सुधार के लिए बनाई गई और नगर पालिका की जिम्मेदारी तय करते हुए दावे कर दिए गए। मगर हाल जस का तस ही रहा। शहर की सड़कों पर व्यवस्था बनाने जैसी कोई कवायद रंग लाती नहीं दिखाई दी। बीच-बीच में अभियान चले भी तो औपचारिकता निभाई गई या फिर विरोध के बाद राजनीतिक दखलअंदाजी के चलते जिम्मेदारों को बैकफुट पर आना पड़ा।
अभी बीते दिनों जाम की दिक्कत को दूर कराने के लिए एक बार फिर कागजी तीर छोड़ा गया। जिसमें हर बार की तरह ई-रिक्शा को मुख्य मार्गों पर लगने वाले जाम की मुख्य मानते हुए रूट निर्धारित कर दिया गया। हालांकि कोई खास परिवर्तन तो रूट को लेकर पहले ही नहीं किया गया था। मगर जो रणनीति बनाई भी गई। उसका भी सड़कों पर कहीं पालन होता नहीं दिखा।
शहर के मुख्य बाजार, जेपी रोड, ड्रमंडगंज चौराहा से सुनहरी मस्जिद मार्ग, चूड़ी वाली गली, नीबू मंडी समेत कई इलाकों में जहां पूर्व से ही नो एंट्री की व्यवस्था चली आ रही है। वहां भी खरीदारों की भीड़ के बीच बेतरतीब तरीके से ई-रिक्शा खड़े रहे और फर्राटा भरते दिखाई दिए। कई बार जाम के हालात भी बनते रहे, लेकिन सख्ती करने या फिर नियम पालन कराने के लिए जिम्मेदार ही नदारद थे। नतीजतन भीषण गर्मी के बीच अव्यवस्था की मार राहगीरों को ही झेलनी पड़ी।
बैरियर तो लगाए, कर्मचारी नहीं दिखे
बाजार से सटे चौराहों पर नो एंट्री लागू रहती है। सुबह आठ से रात के आठ बजे तक इनमें बड़े वाहनों के साथ चार पहिया वाहन और ई-रिक्शा का प्रवेश निषेध रहता है। इसका पालन कराने के लिए चौराहों पर यातायात पुलिस की ओर से मोबाइल बैरियर भी लगाए गए हैं। मगर अधिकांश में शनिवार दोपहर को कोई कर्मचारी ही नहीं था। बाकी दिनों में भी व्यवस्था संभालने का काम होमगार्ड पर निर्भर हैं। इसके चलते वाहन आसानी से नो एंट्री जोन में प्रवेश करते रहे।
अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग भी रही जारी
जाम के मुख्य कारणों में सड़कों पर फैला अतिक्रमण और दुकानों के आगे की जाने वाली बेतरतीब तरीके से वाहनों की पार्किंग भी है। इसे लेकर अभी भी कोई ठोस कदम जिम्मेदार नहीं उठा सके हैं। शनिवार को भी मुख्य बाजार, जेपी रोड, नीबू मंडी समेत कई स्थानों पर बदतर हालात बने हुए थे। जाम लगने के बाद राहगीर परेशान हो रहे थे लेकिन इसकी सुधि लेने के लिए कोई नहीं था।
चार पहिया वाहन भी पहुंच गए मुख्य बाजार
जाम की रोकथाम के लिए बनाए गए नियमों का उल्लंघन करने में सिर्फ ई-रिक्शा चालक ही शामिल नहीं रहे। मुख्य बाजार में चावला चौराहा के आसपास कई चार पहिया वाहन भी पहुंच गए। जोकि काफी देर तक बाजार में ही सड़क घेरकर खड़े रहे। यह आलम तब है जब गैस चौराहा, ड्रमंडगंज चौराहा दोनों तरफ पुलिस के मोबाइल बैरियर लगे हुए हैं। चार पहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक भी लगा रखी है। किसी तरह की सख्ती इस दिशा में होती नहीं दिखी।
विरोध के चलते पीछे खींचने पड़े थे कदम
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों संग होने वाली उद्योग व्यापार बंधु की बैठक में हर बार ई-रिक्शा का रूट तय करने के साथ ही नियमों का पालन कराने की मांग व्यापारियों की ओर से की जाती रही है। इस पर अभियान शुरू भी किए गए थे। बिना पंजीकरण दौड़ रहे दर्जनों ई-रिक्शा को परिवहन विभाग ने सीज भी कर दिया था। जिसके बाद हल्ला मच गया। मामला जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा और फिर बैठकें हुई थी। जिसमें कई बिंदुओं पर रणनीति तय तो कर दी गई लेकिन न तो उस रणनीति पर कोई काम हो सका जिससे ई-रिक्शा चालकों की दिक्कत दूर हो न ही नियम पालन कराने को लेकर सख्ती दोबारा हो सकी।
जाम की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए ई-रिक्शा के रूट निर्धारण को लेकर प्लानिंग चल रही है। इसको जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। सख्ती से नियमों का पालन कराया जाएगा। कोई नो एंट्री में प्रवेश करता मिला तो सीज कर कार्रवाई भी की जाएगी। - वीरेंद्र सिंह, एआरटीओ
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