पीलीभीत: माला नदी का होगा पुनरुद्धार, पीटीआर ने उठाया बीड़ा...7.79 करोड़ का भेजा प्रस्ताव

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Edited By Amrit Vichar
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कछुआ संरक्षण समेत जैव विविधता बढ़ाने के होंगे प्रयास

पीलीभीत, अमृत विचार। जनपद की प्रमुख नदियों में शुमार माला नदी का पुनरुद्धार किया जाएगा। पीलीभीत टाइगर ने इसका बीड़ा उठाया है। पीटीआर प्रशासन द्वारा जंगल क्षेत्र में बह रही नदी की झीलों को पुनर्जीवित करने के साथ ही कछुआ संरक्षण समेत जैवविविधता बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगें। नदी की झीलों पर सोलर पंप लगाने के साथ शारदा मुख्य नहर से भी पानी लेने की योजना बनाई जा रही है। वन अफसरों की मानें तो इससे विलुप्त होने की ओर बढ़ रही नदी का पुनरुद्धार तो होगा ही, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी काफी हद तक कमी आएगी। इसको लेकर पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर ने प्रस्ताव तैयार कर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव को भेजा है।

जनपद में बह रही माला नदी का पौराणिक महत्व भी है। जानकारों की मानें तो यह नदी उत्तराखंड की सीमा से पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल से बहती हुई जनपद के अन्य इलाकों में निकल जाती है। नदी संरक्षण की दिशा में कोई प्रयास न होने की वजह से पीटीआर के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली माला नदी धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही है।

बरसों पूर्व यह नदी वन्यजीवों के लिए खासी मुफीद साबित हुआ करती है। जैव विविधता के लिहाज से भी नदी अपना एक अलग मुकाम रखती थी, लेकिन समय के साथ नदी का स्वरूप ही बदलता जा रहा है। घुमावदार तरीके से बहने वाली इस नदी के अधिकांश झीलें लगभग सूख चुकी है। ऐसे में इन झीलों में रहने वाले जलीय जीव-जंतु भी लगभग खत्म ही हो चुके हैं।

नदी के पानी से खेतों की सिंचाई की जा रही है। वर्तमान में नदी कहीं लकीर तो कहीं झील बनकर बहती नजर आ रही है। वहीं, पीटीआर प्रशासन ने माला नदी के पुनरुद्धार एवं इसकी जैवविविधता को बरकरार रखने का बीड़ा उठाया है। इसको लेकर पीटीआर प्रशासन ने बकायदा एक प्रोजेक्ट तैयार किया है। नदी के पुनरुद्धार के साथ ही घुमावदार स्थानों पर बनी झीलों को पुनर्जीवित किया जाएगा। कछुआ संरक्षण के साथ विलुप्त प्रजाति की मछलियों की ब्रीडिंग की व्यवस्था होगी। इसकी बकायदा मॉनिटरिंग की व्यवस्था होगी। साथ ही जैवविविधता बढ़ाने संबंधी प्रयास किए जाएंगे।

इको सिस्टम मजबूत बनाएगा 7.79 करोड़ का प्रोजेक्ट
पीटीआर प्रशासन ने माला नदी के पुनरुद्धार एवं जैवविविधता बढ़ाने को 7.79 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है। पीटीआर प्रशासन के मुताबिक नदी के घुमावदार स्थानों पर बनी झीलों को पुनर्जीवित करने के लिए सोलर पंप लगाए जाएंगे। इसके साथ ही शारदा मुख्य नहर से पानी लाने के लिए करीब 200 मीटर लंबी कैनाल पर भी काम किया जाएगा।

माला नदी के पुलों की फैसिंग कराई जाएगी। कछुओं की विभिन्न प्रजातियों का नर्सरी युक्त ब्रीडिंग स्टेशन और मछली प्रजनन केंद्र को विकसित किया जाएगा। मछली प्रजनन केंद्र में जनपद में विलुप्त होती जा रही मछलियों की प्रजातियों कह ब्रीडिंग हो सकेगी।  वहीं इस पूरे प्रोजेक्ट के निगरानी के भी खास इंतजाम किए जाएंगें। मॉनिटरिंग स्टेशन के साथ वॉच टावर स्थापित किए जाएंगे।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में आएगी कमी
वन अफसरों की मानें तो इस पूरे प्रोजेक्ट के तैयार होने से इको सिस्टम मजबूत होगा। वन्यजीवों की एक दूसरे पर निर्भरता बढ़ेगी। नदी एवं इसकी झीलों के जहां-तहां सूखने एवं फूड चेन में आई कमी आदि के चलते वन्यजीव जंगल क्षेत्र से बाहर निकल रहे हैं। नदी के पुनरुद्धार एवं जैव विविधता को बढ़ावा मिलने से वन्यजीवों के बाहर निकलने में कमी आएगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।

पीटीआर के वन क्षेत्र में बह रही माला नदी के पुनरुद्धार एवं जैवविविधता संबंधी एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। इसका प्रस्ताव बनाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव को भेजा गया है - मनीष सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व

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