बरेली: झूलते पटरों से गुजर रही नरखेड़ा वासियों की गाड़ी, जान जोखिम में डाल रहे लोग

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Edited By Amrit Vichar
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मीरगंज, अमृत विचार : शाही थाना क्षेत्र के गांव नरखेड़ा के पास भाखड़ा नदी के घाट पर लकड़ी के पुराने टूटे -पटरों के सहारे बने पुल को देखकर एक बारगी किसी काे भी डर लगे। पैर रखते ही कमजोर पटरे हिलने लगते हैं, फिर भी ग्रामीण कलेजा मजबूत करके इसी पुल से आवागमन करते हैं।

पैदल के साथ ही बाइक और साइकिल सवार भी इन्हीं टूटे- पटरों पर जिंदगी का सर्कस खेलते नजर आते हैं। इस पुल से 22 से अधिक गांवों के लोग मीरगंज-शाही की साप्ताहिक हाट-बाजार और रोजमर्रा के जरूरी कामकाज निपटाने के लिए जान जोखिम में डालकर इस खतरनाक पुल से गुजर रहे हैं।

यह सिलसिला दो-चार साल से नहीं, बल्कि कई दशक से जारी है। नरखेड़ा पटरी पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों से यहां मौजूद कुछ युवक 10 से 20 रुपये किराया वसूलते हैं, क्योंकि यहीं लोग ग्रामीणों के सहयोग से लकड़ी व्यवस्था करके पुल बनाने से लेकर टूट फुट तक सही करते हैं। पेट पालने के लिए राहगीरों से कुछ रुपये लेते है ।यदि कोई देकर नही जाता है तो उससे जबरदस्ती भी नहीं करते ।लकड़ी के पटरों का ऐसा ही पुल नरखेड़ा से कुछ दूरी पर भाखड़ा नदी किनारे बसे रेतीपुरा गांव किनारे भी है।

बलेही पहाड़पुर समेत कई गांवों के लोगों के आवागमन का यही एकमात्र साधन है। पशुओं को चराने ले जाना हो या खेतों से चारा काटकर लाना, इसी खतरनाक पुल से होकर लोगों को आना-जाना पड़ता है। ग्राम नरखेड़ा ,बलेही पहाड़पुर ,रेतीपुरा ,सुकली, नरेली रसूलपुर व खानपुर तथा मंडवा बंशीपुर सहित लगभग 22 गांवों के लोग लकड़ी के पुल से रोजाना गुजरते हैं। 

ग्राम वासियों को मीरगंज धनेटा होकर लगभग 25 किलोमीटर दूर घूमकर तहसील मीरगंज आना पड़ता है जबकि गांव से मीरगंज की दूरी मात्र 6 -7 किलोमीटर है। सैकड़ों बच्चे मिर्जापुर से धनेटा होकर 25 किमी का सफर करके मीरगंज जाते हैं।

डीबीओएल शुगर मिल में गन्ना लाने और अस्पताल पहुंचने में भी दिक्कत होती हैं।नरखेड़ा ही नहीं आसपास के 15-20 गांव की 50 से 60 हजार की आबादी परेशान होती है छह महीने लकड़ी का पुल बनाकर निकलते हैं। बारिश में जब नदी उफान पर होती है, तो रस्सी के सहारे नाव से निकलते हैं।

ग्रामीण कहते हैं जब से होश संभाला है, यहां ऐसा ही देखा है। हर साल मानसून खत्म होने के बाद लोग लकड़ी का पुल बनाते है। जब मानसून आता है तो उस पुल को उखाड़ लेते हैं। फिर पांच-छह महीने नाव का सहारा लेते हैं। जनता को एक पुल चाहिए। जिससे वह सीधे सिंधौली होते हुए मीरगंज पहुंच सके। ग्रामीणों ने 2022 के विधानसभा चुनाव में पुल नही तो वोट नहीं का नारा देकर धरना प्रदर्शन किया था।

पुल न होने की वजह से हमें गांव भी छोड़ना पड़ा और पढ़ाई भी छोड़नी पढ़ी। इस वजह से हमें मीरगंज रहकर पढ़ाई करनी पड़ी और बीए की पढ़ाई पूर्ण कर अब हम चाट का ठेला लगा रहे हैं- सुनील कश्यप, ग्रामीण नरखेड़ा

नरखेड़ा के समीप भाखड़ा नदी पर पुल की मांग ग्रामीण लगातार करते आए हैं, क्षेत्रीय विधायक इसका मुद्दा विधानसभा में भी उठाया था,जल्द पुल का निर्माण होगा और लोगों की सहूलियत मिलेगी- छत्रपाल ग्राम प्रधानपति ग्राम नरखेड़ा

गांव नरखेड़ा में काफी समय से लकड़ी के पुल से होकर गुजरते हैं छोटे बड़े सभी इसी पुल से जाते हैं, उम्मीद है कि अब है अब जल्द पुल का निर्माण हो जाए- सुंदर लाल, ग्रामीण नरखेड़ा

मैंने गांव नरखेड़ा के समीप भाखड़ा नदी पर ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए पुल के निर्माण की सरकार से मांग की थी। विधानसभा में भी पुल का मुद्दा उठाया था, बहुत जल्द यहां पर पुल का निर्माण कराया जाएगा क्षेत्र की सभी प्रमुख समस्याओं को सरकार के समक्ष रखते हैं और क्षेत्र में अपार विकास कराया है- डॉक्टर डीसी वर्मा, क्षेत्रीय विधायक, मीरगंज

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