शाहजहांपुर: तपती टिनशेड के नीचे लू के थपेड़े झेल रहे गोवंश, जानिए जलालाबाद की गोशाला का हाल

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Edited By Amrit Vichar
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जलालाबाद, अमृत विचार: निराश्रित गोवंश के लिए चलाई जा रहीं गोशालाओं में कई जगह टिनशेड के नीचे गोवंश बेहाल हैं। इन्हीं में एक जलालाबाद के गांव चकरेना की है। यहां बदहाली का आलम यह है कि चारदीवारी तक नहीं है।

उबाल कर रख देने वाली दोपहरी में पशु तपती टिनशेड के नीचे लू के थपेड़े झेल रहे हैं। टिनशेड भी नाममात्र को पड़ा है। ऐसे में कुछ पशुओं का पूरा दिन इस चिलचिलाती धूप में हांफते हुए गुजर रहा है। खाने के लिए रूखा भूसा दिया जा रहा है। उसमें घी की तरह दाना डाला जा रहा है। पेड़ की छांव के सहारे पशु धूप से बचते हुए दिखाई दे रहे हैं।

अमृत विचार ने मंगलवार को जलालाबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत रूपापुर के ग्राम चकरेना की गोशाला में सुविधाओं की पड़ताल की। इस दौरान देखा कि गोशाला में लगभग 90 गोवंश हैं। पानी और चारे की व्यवस्था तो है, लेकिन संतोषजनक नहीं है। रज्जन लाल, आदर्श कुमार, विपिन कुमार, बच्चू गोसेवक तैनात हैं। टिनशेड में एक भी पंखा नहीं है। पानी के लिए ट्यूबवेल का प्रयोग किया जाता है। पशुओं को धूप से बचाने के लिए तिरपाल की व्यवस्था नहीं है।

गोशाला में ठीक से साफ-सफाई भी नहीं है। हौद में ठंडा पानी भरा जाता है, लेकिन इस भीषण गर्मी में दोपहर के समय पानी खौलने लगता है। जबकि दोपहर में पशुओं को सबसे ज्यादा प्यास लगती है। धूप में टीन शेड के नीचे खड़े गोवंश भी बेहाल दिखाई दिए। कुछ पशु बहुत कम छांव वाले पेड़ों के नीचे बंधे हुए थे। दोपहर के समय टिनशेड के नीचे गोवंश हांफते हुए देखे गए। 

ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला में खाने के लिए भूसा और हरा चारा दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। हरा चारा पशुओं को नहीं मिल पा रहा है। जबकि गोशाला के पास ही बोया गया है। बोया गया चारा शोपीस बना हुआ है। पशुओं को खिलाने के लिए दाना बोरी में रखा हुआ है, लेकिन यह भूसे पर दिखाई नहीं दे रहा है। भूसे पर दाना ऐसे डाला गया है कि मानो दाल या सब्जी में घी डाला गया हो।

गायों को खिलाया जाए पेठा, लगाए जाएं पंखें
भीषण गर्मी में लोग परेशान हैं। इंसान ही नहीं, जानवरों का भी हाल बेहाल है। ऐसे में गोशालाओं में विशेष इंतजाम किए जाने की जरूरत समझी जा रही है। गो प्रेमियों का कहना है कि स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव गोशालाओं में किया जाना चाहिए। गायों को खाने में हरे चारे के साथ कच्चा पेठा और काला नमक दिया जाना चाहिए। पंखे भी लगाए जाएं ताकि पशुओं को भीषण गर्मी से राहत मिले। टिनशेड के साथ ग्रीन नेट भी लगाया जाए, जिससे गायों को धूप से बचाया जा सके। बीमार गायों के उपचार के लिए अलग वार्ड भी बनाया जाए। पशुओं को भूसे के साथ हरा चारा भी दिया जाए।

चकरेना गोशाला के विषय में जानकारी नहीं है। अगर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाए- डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, सीवीओ

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