उम्मीदें कायम

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Edited By Amrit Vichar
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कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन के इंतजार में पूरी दुनिया है। इस बीच देश में संक्रमण के मामलों में कमी भी आ रही है। हालांकि अभी और सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि विशेषज्ञ सर्दी के मौसम में कोरोना के दूसरे लहर की आशंका भी जता रहे हैं। इसके पीछे की वजह …

कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन के इंतजार में पूरी दुनिया है। इस बीच देश में संक्रमण के मामलों में कमी भी आ रही है। हालांकि अभी और सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि विशेषज्ञ सर्दी के मौसम में कोरोना के दूसरे लहर की आशंका भी जता रहे हैं। इसके पीछे की वजह सर्दी के मौसम के साथ ही त्योहारी सीजन भी है। मगर महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों ने अब मास्क का प्रयोग करने के साथ ही तमाम सावधानियों को गंभीरता से लिया है। एक हालिया सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 80 प्रतिशत लोग कोरोना संक्रमण को लेकर तमाम तरह की जरूरी सावधानियां बरत रहे हैं।

इस बीच कोरोना वैक्सीन के अंतिम चरण के परीक्षण की खबरों के बीच एक राहत भरी यह खबर आई है कि वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के बाद हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को अक्षम बनाने में कोरोना वायरस द्वारा प्रयोग किए जाने वाली प्रोटीन का पता लगाते हुए उसे रोकने का तरीका ढूंढ निकाला है। इसके आधार पर कहा जा रहा है कि इस शोध से संक्रमण के लिए नई दवा बनाने में मदद मिल सकती है। यानी एक तरफ वैक्सीन के अंतिम चरण के शोध और साथ ही वायरस के खिलाफ कारगर दवा बनने की उम्मीद।

यह दावा एक अमेरिकी विश्व विद्यालय के शोधकर्ताओं ने किया है कि सार्स-सीओवी-2 द्वारा प्रयोग किए जाने वाले मॉलिक्यूलर सीजर एंजाइम को रोकने का काम करने वाले दो मॉलिक्यूल विकसित किए गए हैं। यह शोध प्रसिद्ध जर्नल साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद एक तरफ तो वैक्सीन विकसित करने के लिए विश्व भर के शोधकर्ताओं ने शोध शुरू कर दिए थे, साथ ही संक्रमण होने के बाद उसके खिलाफ दवा बनाने की दिशा में भी काम हो रहा था। वैक्सीन को लेकर तो उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं, मगर कोरोना वायरस के खिलाफ दवा बनाने की दिशा में अब तक कोई महत्वपूर्ण परिणाम सामने नहीं आया था।

अगर अमेरिका विश्वविद्यालय के शोधकर्ता वायरस के खिलाफ दवा बनाने की तरफ बढ़ते हैं तो यह निश्चित ही इस महामारी को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। शोधकर्ताओं ने पाया है कि वायरस का पीएलप्रो मानव प्रोटीन को प्रोसेस कर संक्रमण बढ़ाने का काम करता है। यानी वह वायरस की मारक क्षमता की तह तक पहुंच चुके हैं। इसी पर शोध केंद्रित करते हुए शोधकर्ताओं ने वायरस के संक्रमण फैलाने में कारगर प्रोटीन को रोकने के लिए अवरोधकों का विकास किया है। उम्मीद की जानी चाहिए की इस दिशा में वैज्ञानिकों के प्रयोग सार्थक होंगे और कोरोना के खिलाफ जंग में वैक्सीन के साथ ही दवा बनाने की दिशा में भी विजयश्री मिलेगी।