पीलीभीत: मौसम की मार...ओपीडी 1200 के पार, डायरिया और पीलिया के बढ़े मरीज, ओआरएस की बढ़ी डिमांड
पीलीभीत,अमृत विचार: गर्मी में हर कोई परेशान है। गर्म हवाओं के थपेड़ों से राहगीरों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो रहा है। वहीं मौसम की मार अब मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी देखने को मिल रही है। मरीजों की संख्या 1200 के पार पहुंच गई है। इनमें अधिकतर मरीज डायरिया, हीट स्ट्रोक के अलावा पीलिया की बीमारी से पीड़ित आ रहे हैं।
ओपीडी में खड़े होने तक की जगह नहीं बच रही है। मरीजों को जैसे-तैसे दवाएं व परामर्श दिया जा रहा है। पीलिया से पीड़ित मरीज हेपाटाइटिस बी और सी के शिकार हो रहे हैं। मगर मेडिकल कॉलेज में हेपेटाइटिस की बीमारी का इलाज नहीं है। ऐसे में इन मरीजों को परामर्श देने के बाद रेफर किया जा रहा है।
बदलते मौसम का असर अब लोगों की सेहत पर भी भारी पड़ रहा है। इन दिनों तापमान 40 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। जिस कारण सप्ताह भर से मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। गुरुवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी 1389 रही। जिसमें ऑनलाइन ओपीडी के पर्चे भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज के अफसरों की मानें तो आंकड़ा इतना बढ़ जाएगा, उम्मीद नहीं थी।
वैसे संख्या 1000, 1100 के ईद-गिर्द रहती है लेकिन अचानक से मौसम ने करवट ली तो मरीज बढ़ गए। आलम ये था कि डॉक्टरों के चैंबर से लेकर दवा काउंटर तक लंबी कतारें लगी रहीं। मरीज डॉक्टरों के कक्ष के बाहर अपनी बारी आने का इंतजार करते रहे। डॉक्टरों से परामर्श लेने के बाद दवा ली। दवा काउंटर भी घंटों लाइन में लगने के बाद उन्हें दवा मिल सकी। हालांकि अब दवा के दो काउंटर कर दिए गए हैं।
एक काउंटर पर पुरुष और दूसरा महिलाओं के लिए बनाया गया है। ओपीडी में मेडिकल कॉलेज के डॉ. रवि ने बताया कि ओपीडी में खांसी, जुकाम, टाइफाइड, डायरिया के साथ पीलिया और गले में खराश के मरीज आ रहे हैं। ये सब बीमारी मौसम बदलाव के कारण व साफ पानी न पीने के कारण हो रही है। बता दें जिले के अधिकतर गांवों में पीने को पानी साफ नहीं आता है और जल स्तर भी खराब हो चुका है। ऐसे में लोगों को साफ पानी पीने के लिए नहीं मिल रहा है। लोगों को पीलिया की शिकायत भी आ रही है।
अस्पताल में तीन से पांच मरीज पीलिया के आ रहे हैं। वहीं खांसी, जुकाम के मरीज मौसम में बदलाव के कारण बढ़ रहे हैं। पीलिया के मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी की दिक्कत सामने आ रही है। जिसका इलाज मेडिकल कॉलेज में नहीं हो पा रहा है। इसलिए उनको परामर्श देने के बाद उन्हें जिला अस्पताल और सीएमओ के अधीन अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि गर्मी के कारण लोग डिहाईड्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं। जिन्हें पानी और ओआरएस पीने की सलाह दी गई है। वहीं चर्म रोग विभाग में डॉ. एसपी सिंह के पास भी खुजली, दाद, इन्फेक्शन और स्किन संबंधित बीमारी तेजी से बढ़ रही है।
हेपेटाइटिस की जांच, मगर अस्पताल में दवाई नहीं
भले ही संयुक्त चिकित्सालय को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिल हुए तीन साल बीत चुके हो। लेकिन अभी भी मेडिकल कॉलेज में दवाओं को पैटर्न पुराना ही चल रहा है। जिस वजह से अधिकतर बीमारियों और गंभीर मरीजों का इलाज संभव नहीं है। जिन्हें आज भी रेफर किया जाता है।
इसी तरह मेडिकल कॉलेज में पीलिया के मरीजों में हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण मिल रहा है। इन मरीजों को हेपेटाइटिस का इलाज नहीं मिल पा रहा है। सिर्फ पुष्टि करने के लिए लैब में इसकी जांच की सुविधा मौजूद है। जांच में पुष्टि होने के बाद इन मरीजों को डॉक्टर रेफर कर देते हैं। कारण क्योंकि यहां हेपेटाइटिस बी और सी की दवा ही उपलब्ध नहीं है।
ओआरएस और ग्लूकोज की डिमांड बढ़ी
ज्येष्ठ की गर्मी में हर कोई बेहाल है। लोग को चलते चलते बेहोशी चढ़ रही है। इतना ही नहीं अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज पहुंच रहे हैं। जिन्हें ग्लूकोज और ओआरएस पीने की सलाह दी जा रही है। क्योंकि ओआरएस शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। जिस वजह से बीते 15 दिनों से ग्लूकोज, एनर्जी ड्रिंक और ओआरएस की मांग बढ़ गई है। अप्रैल के मुकाबले मई में इसकी मांग चार गुना अधिक हो गई है।
सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों को ओआरएस दिया जा रहा है। जिला ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक हर रोज जिले में करीब चार से सात लाख रुपये के ग्लूकोज, एनर्जी ड्रिंक के अलावा उससे जुड़े सामान की बिक्री हो रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में भी करीब एक माह में डेढ़ लाख से अधिक ओआरएस के पाउच वितरण किए जा चुके हैं।
लू से बचने के लिए कारगर घरेलू उपाय
- हाइड्रेटेड रहें ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं।
- हल्के और ढीले कपड़े पहनें हल्के और सूती कपड़े पहनें।
- घर को ठंडा रखें दिन के समय खिड़कियों पर पर्दे डालकर रखें ताकि धूप अंदर न आए।
- खाने-पीने में बदलाव करें और घर के अंदर आराम करें।
बदलते मौसम के कारण मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिनमें डायरिया, उल्टी, दस्त, पीलिया आदि के मरीज निकल रहे हैं। इसलिए ओपीडी में डॉक्टरों को समय से बैठने के निर्देश दिए हैं। ताकि मरीजों को इलाज मिल सके। अस्पताल में ओआरएस कॉर्नर भी बनाया गया है। मरीजों को दवा के साथ ओआरएस भी दिया जा रहा है, ताकि लू से बचे रहें- डॉ. एसपी सिंह, प्रभारी सीएमएस, पुरुष अस्पताल विंग मेडिकल कॉलेज
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