Kanpur: एक महीने में मिले 76 अज्ञात शव, शिनाख्ती सुस्त, नियमानुसार 72 घंटे बाद कर दिया जाता अंतिम संस्कार
कानपुर, अमृत विचार। एक मई से 30 मई तक कमिश्नरेट के अलग-अलग थानाक्षेत्रों में 76 अज्ञात शव मिले। पुलिस ने शवों को मार्चुरी में रखवा दिया। इनमें से एक आध की ही परिजन शिनाख्त करने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। बाकी अन्य को 72 घंटे बाद गुमनामी का कफन ओढ़ा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया। ज्यादातर शव पुरुषों के हैं। पुलिस अज्ञात शवों की शिनाख्त कराने की प्रयास भी नहीं करती। अधिकतर को भिखारी या विक्षिप्त बताकर पलड़ा झाड़ लेती है।
शिनाख्ती का नियम
अज्ञात शव मिलने पर पहचान के लिए 72 घंटे तक उसे मार्चुरी में रखना होता है। इसके बाद एनसीआरबी के जरिए जिपनेट एप पर शव की फोटो खींचकर अपलोड कर दूसरे जिलों और प्रदेशों में भेजी जाती है। संबंधित थाने की पुलिस को फोटो और हुलिए के साथ पहचान के लिए पर्चे छपवाकर सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करना होता है। सोशल मीडिया के जरिए और अखबारों में इसका विज्ञापन निकलवना होता है। इस झमेले से पुलिस पूरी तरह बचती है और शिनाख्त के लिए कोई कदम नहीं उठाती है।
गर्मियों में सड़ने लगते शव
वर्तमान में पोस्टमार्टम हाउस में चार डीप फ्रीजर हैं। पोस्टमार्टम हाउस में जिस शव का 72 घंटा पूरा हो जाता है, उसके लिए पंचनामा की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। शव डीप फ्रीजर में रख देते हैं। इन दिनों भीषण गर्मी के कारण शव जल्दी सड़ने लगते हैं।
भर्ती कराए कुछ मरीज हो जाते लावारिस
अज्ञात शवों को लेकर एक सच्चाई मेडिकल कॉलेज से भी जुड़ी है। हर वर्ष बहुत से लावारिस लोगों को बीमारी या घायलावस्था में भर्ती कराया जाता है। भर्ती कराने के दौरान उनका नाम पता भी अंकित होता है, मगर जब मौत के बाद जांच की जाती है तो पता फर्जी निकलता है। इस कारण कुछ की पहचान ही नहीं हो पाती है।
दो दिन में मिले 16 अज्ञात शव
बुधवार को फजलगंज में तीन, महाराजपुर, मूलगंज, गुजैनी, चकेरी में एक-एक कुल सात शव मिले थे। गुरुवार को 9 अज्ञात शव मिले। इन सभी की मौत का कारण गर्मी, लू और हीट स्ट्रोक बताया गया हालांकि मौत का सही कारण पोस्टमार्टम के बाद पता चलेगा।
हुलिया पहचानने के लिए नहीं की शुरुआत
अज्ञात शवों की पहचान के लिए पोस्टमार्टम हाउस के प्रभारी डॉ नवनीत चौधरी ने बताया था कि उन्होंने सीएमओ आलोक रंजन को पत्र लिखा था। जिसमें यह कहा गया था कि अज्ञात शवों की पहचान के लिए पोस्टमार्टम परिसर में अज्ञातों के हुलियों की फोटो लगाई जाए, जिससे लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़ा।
अभी ऐसे में लोग हैलट, संबंधित थाना के चक्कर लगाते रहते हैं, जहां से उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है। हुलिए के फोटो लगने पर आसानी से शव की पहचान की जा सकेगी। लेकिन इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
