हीट स्ट्रोक से घाटों पर बढ़ रही चिताओं की संख्या, पोस्टमार्टम हॉउस में शवों की लग रही कतार 

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज, अमृत विचार। संगम नगरी प्रयागराज और श्रृंग्वेरपुरधाम को अध्यात्म और मोक्ष की नगरी माना गया है। इस भूमि पर जहां एक तरफ लोग पुण्य अर्जित करने के लिए पूजा-अर्चना और दान के साथ यज्ञ अनुष्ठान करते है वहीं दूसरी तरफ मोक्ष पाने के लिये चिताओं का अंतिम संस्कार भी किया जाता है। कोरोना काल मे शवों को दफन किये जाने के बाद श्रृंग्वेरपुरधाम का शमशान घाट काफी चर्चा में था। वहीं अब हीट स्ट्रोक के चलते होने वाली मौतों के बाद पिछले कुछ दिनों दशाश्वमेध घाट, रसूलाबाद घाट और श्रृंग्वेरपुरधाम के शमशान घाट पर जलने वाली चिताओं की संख्या बढ़ रही है। वैसे तो रोज तीस चिताएं श्मशान घाट पर जलाई जाती हैं। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से इसमें इजाफा हुआ है। पिछले एक सप्ताह के अंदर चिताओं की संख्या बढ़ने के बाद लकड़ियों और अन्य सामानों के दाम भी बढ़ गए हैं। 

श्रृंग्वेरपुर में चिताओं को नहीं मिल रही जगह
श्रृंग्वेरपुर घाट पर चिता जलने की भी जगह नहीं रही रही है। श्रृंग्वेरपुरधाम के श्रीरामघाट की ओर जाने वाली सड़कें जाम से पूरी तरह बंद है। स्थानीय दुकानों के कारण हर वक्त भीड़ बनी है। घाट पर चिताओं को स्थान नहीं मिल रहा है। ज्यादातर शव बुजुर्ग और महिलाओं के आ रहे हैं।

घाट पर अंतिम संस्कार का सामान हुआ महंगा 
दारागंज, रसूलाबाद, श्रृंग्वेरपुरधाम के श्मशान घाट पर  चिताओ की संख्या बढ़ने के बाद अब सामानो के दामों मे भी बढ़ोत्तरी कर दी गयी है।  पिछले कई दिनों में पानी की बोतलें और कोल्ड ड्रिंक के साथ लकड़ी, और अंतिम संस्कार मे उपयोग होने वाले सामानो के दाम भी बढ़ गये है। 

पोस्टमार्टम हॉउस लग रही शवों की कतार  
एसआरएन की मर्चरी में भारी भीड़ लगी रही। यहां लाशों को डिफ्रीजर में रखा जा रहा है। बिजली कटौती के कारण शव का पोस्टमार्टम नही हो पा रहा है। एक डिफ्रीजर के खराब होने की वजह से शव खराब हो रहे हैं। अंदर रखे शवो को उनके परिजन पहचान नही पा रहे है। एक दिन में मर्चरी में लगभग 10 से 12 शव आते थे। वहीं अब इसकी संख्या करीब तीन गुना बढ़ गई है। पोस्टमार्टम हाउस के एक कर्मचारी ने बताया कि दो दिन से शवों का तांता लगा है। इस तरह कोरोना के समय शवों के ढेर लग रहे थे। गर्मी की वजह से शवों से दुर्गंध उठने से वहां काम करना मुश्किल हो रहा है।

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