प्रशासनिक उपेक्षा से सुलतानपुर में लाखों की जलापूर्ति योजना ने तोड़ा दम, कई गांव प्रभावित
विंदेश्वरीगंज/ सुलतानपुर, अमृत विचार। सरकार जल जीवन मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर गांव-गांव नई जलापूर्ति संसाधन विकसित कर रही है, लेकिन जहां पहले से लाखों खर्च कर जलापूर्ति संसाधन स्थापित है उसके जीर्णोद्धार के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। बल्दीराय तहसील क्षेत्र के देहली बाजार के शुकुलपुर गांव में दो दशक पहले लाखों खर्च कर स्थापित किया गया ओवरहेड टैंक आज सफेद हाथी साबित हो रहा है। यदि इस योजना का जीर्णोद्धार कराकर संचालन कराया जाए तो आधा दर्जन गांवों में जलापूर्ति की समस्या दूर हो जाएगी।
बल्दीराय तहसील क्षेत्र के देहली बाजार के शुकुलपुर गांव में 2001 में देहली ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत लाखों रुपये खर्च कर 200 किलोलीटर का ओवरहेड टैंक स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना तत्कालीन राज्य मंत्री रहे जय नारायण तिवारी ने कराया था। ओवरहेड टैंक में पानी भरने के लिए नलकूप भी स्थापित हुआ है। पानी की आपूर्ति के लिए देहली बाजार, शुकुलपुर, अतौला, खानजोत व आस पास के क्षेत्रों में वाटर सप्लाई लाइन का विस्तार किया गया। 2005 तक ओवरहेड टैंक का संचालन किया जाता रहा। इससे करीब दो हजार आबादी को निर्बाध जलापूर्ति मिलने लगी थी। इसके बाद अचानक ओवरहेड टैंक का संचालन बंद कर दिया गया। समय बीतने के साथ ओवरहेड टैंक भी जर्जर हो चुका है। यहां से जुड़ी पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। परिसर में लगा नलकूप भी बंद पड़ा है। ग्रामीण पेयजल योजना अमेठी जिले के जल निगम के अधीन चल रही है। ग्रामीणों को पेयजल के लिए इंडिया मार्का टू हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है। क्षेत्र के सत्यदेव पाल, राजेंद्र, राजदेव पाल, ननकुन चौहान ने बताया कि टंकी अगर चले तो करीब दो हजार की आबादी को जलापूर्ति मिल सकती है। गर्मी में ग्रामीणों को ज्यादा परेशानी हो रही है। राज्यमंत्री जय नारायण तिवारी ने 24 वर्ष पहले राजकीय जल निगम के टंकी का निर्माण करवाया गया था। उस समय जय नारायण तिवारी राज्य मंत्री थे। स्थानीय लोगों की मांग पर इस राजकीय जल निगम की टंकी का निर्माण कराया।

ग्रामीणों ने कहा कि टंकी चले तो बुझे प्यास
शुकुलपुर निवासी राजदेव पाल ने बताया कि बनने के चार-पांच साल तक पानी मिला। उसके बाद बिल्कुल पूरी तरह बंद हो गई। इसका पुनः जीर्णोद्धार होना चाहिए। पूरे चेत सिंह निवासी ननकुन चौहान ने कहा की पुनः इसको चालू करवाया जाए। ताकि भीषण गर्मी में गहराई से आने वाला शुद्ध जल ग्रामीणों को मिल सके। देहली निवासी राजेंद्र अग्रहरि ने कहा कि टंकी की पानी से काफी राहत मिलती थी। अब केवल हैंडपंप ही गर्मी में जीने का सहारा है। नहीं तो पानी नहीं मिल सकता। हैंडपंप अगर बंद हो जाए तो तो पानी की बहुत किल्लत होती है। शुकुलपुर निवासी सत्यदेव पाल कहते हैं टंकी बनने के चार-पांच साल तक चली। इसके बाद विभाग संबंधी अब कोई यहां देखने तक नहीं आता।
बीडीओ धनपतगंज नीलिमा गुप्ता ने बताया कि इस तरह की कोई योजना उनके संज्ञान में नहीं है। विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर पेयजल योजना के संचालन का प्रयास किया जाएगा।
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