बाराबंकी : दिव्यांग बच्चों को स्कूल छोड़ने जाने वाले अभिभावकों को मिलेगा भत्ता 

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Edited By Amrit Vichar
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स्कार्ट योजना के तहत हर साल मिलेगें छह हजार रूपये, शिक्षा की राह में दिव्यांग बच्चों की शारीरिक कमी नहीं बनेगी बाधा

सत्तर प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले बच्चे योजना के लिए होंगे पात्र 

बाराबंकी, अमृत विचार । शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए शासन ने दिव्यांग बच्चों के लिए बड़ी पहल की है। बच्चों की शारीरिक कमी उनकी शिक्षा की राह में बांधा नहीं बनेगी।अब उनके अभिभावकों को इसके लिए छह सौ रूपए प्रतिमाह के हिसाब से दस माह तक का भत्ता खाते में भेजा जायेगा। सत्तर प्रतिशत से अधिक दिव्यांग  वाले बच्चे योजना के लिए पात्र माने जायेंगे। जिले को 273 बच्चों का लक्ष्य दिया गया है। बच्चों को चिन्हित कर प्रेरणा पोर्टल पर डाल कर मार्क कराया जा रहा है। 

दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए शासन स्तर से लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे बच्चों के लिए समेकित शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत अभी तक बच्चों को ट्राई साइकिल या अन्य उपकरण उपलब्ध करायें जाते रहे। जिससे वह स्कूल आ जा सके। जिले में ऐसे तमाम बच्चे हैं जो स्वयं उपकरणों के सहारे विद्यालय आ जा नहीं सकते थे। उनको स्कूल आने जाने के लिए किसी न किसी सहारे की जरूरत पड़ती थी।

बच्चों को उनके अभिभावकों को विद्यालय छोड़ने जाना पड़ता है। ऐसे में गरीब परिवारों के बच्चों को स्कूल पहुंचाने पर अतिरिक्त भार पड़ता था। शासन ने उनका यह भार उठाने का निर्णय लिया है। अब सरकार की तरफ से उनको प्रति वर्ष भत्ता दिया जाएगा। इसके लिए स्कार्ट योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत अभिभावकों को साल में छह हजार रुपए भत्ते के रूप में मिलेंगे।

जिससे वह अपने बच्चों को आसानी से स्कूल पहुंचा सके। डीसी समेकित शिक्षा सुधा जायसवाल के मुताबिक, शासन से 6 से 14 साल तक के दिव्यांग बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए स्कार्ट योजना चलाई जा रही है। 70 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले बच्चे योजना के लिए पात्र माने जायेंगे। इसको लेकर शासन से अभी लक्ष्य नहीं मिला है।

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