पीलीभीत: चंदिया हजारा क्षेत्र के 428 परिवार सिर्फ नाम के किसान, दो पीढ़ी गुजरने के बाद भी जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला...जानें पूरा मामला

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पूरनपुर, अमृत विचार। करीब पांच दशक पहले विस्थापित परिवारों को आवंटित की गई जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है। दशकों से ग्रामीण जमीन पर खेती करते चले आ रहे हैं। राजस्व अभिलेखों में जमीन उनके नाम दर्ज न होने से वह सरकारी योजना और सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते। 

इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने बैठक की और इसके निस्तारण की रणनीति बनाई। जल्द ही ग्रामीण इस मामले के निस्तारण के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधियों से भी मिलेंगे।

बताते हैं कि वर्ष 1970 में शारदा नदी के किनारे करीब 500 परिवारों को वन विभाग से हस्तांतरित जमीन देकर बसाया गया था। गुजर बसर के लिए खेती-बड़ी करने को 300 परिवारों को तीन एकड़ और 128 परिवारों को ढाई एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। हालांकि 13 परिवार अभी भी ऐसे हैं जिनको जमीन आवंटित नहीं की गई है। जमीन मिलने के बाद से ग्रामीण उस पर खेती करते चले आ रहे हैं। 

कई बार आवंटन में मिली जमीन शारदा नदी में आई बाढ़ में भी समा गई लेकिन जमीन और राजस्व अभिलेखों में दर्ज न होने से ग्रामीणों को उसका मुआवजा तक नहीं मिल सका। 

भूमि आवंटन के समय सिर्फ ग्रामीणों को एक प्रमाण पत्र दिया गया था जो किसी काम का नही है। लगभग 50 वर्ष से ग्रामीण जमीन पर खेती कर रहे हैं लेकिन पट्टे न होने और राजस्व अभिलेख में जमीन उनके नाम दर्ज न होने से वह केसीसीसी, किसान सम्मन निधि, गन्ने के सट्टे, जमानत आदि का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। वह सिर्फ नाम के किसान है। राजस्व अभिलेखों में उनका नाम न होने से वह पंजीकृत किसान नही है। इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। 

सोमवार को इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने चंदिया हजारा गांव में बैठक की। इस बैठक में समितियों के प्रतिनिधि और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे। वर्षों से चली आ रही इस समस्या का किसी भी प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि ने निस्तारण नहीं कराया। इससे खेती-बड़ी करने के बावजूद सैकड़ो ग्रामीण दस्तावेजों में भूमिहीन है। 

ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि बैठक में समस्या के निस्तारण को लेकर चर्चा की गई है। जल्द ही जिले के शासन प्रशासन को दस्तावेजों के साथ अवगत कराया जाएगा। समस्या के निस्तारण के लिए जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात की जाएगी। समस्या का निस्तारण न होने पर दूसरे विकल्प निकाले जाएंगे।

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